जयपुर , फरवरी 27 -- राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि परवन वृहद परियोजना कोटा, झालावाड़और बारां जिलों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में परियोजना में अनियमितताएं सामने आयीं, जिनसे कार्यों में देरी हुई। श्री रावत प्रश्नकाल में विधायक प्रमोद जैन 'भाया' के पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि परवन वृ़हद परियोजना हाड़ौती अंचल के लिए जीवनदायिनी बनेगी और इसके कार्यों को गुणवत्ता से पूरा कराने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि परियोजना की अनियमितताओं के प्रकरणों का परीक्षण कराकर कार्यवाही की जाएगी। इसमें संवेदक दोषी पाये जाते हैं तो वसूली करेंगे। विभागीय अधिकारी लिप्त होंगे तो उनके विरूद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत पूर्ववर्ती सरकार के दौरान 15 में से एक भी गेट नहीं लगाया गया था, जबकि हमारी सरकार ने दो वर्ष में ही 14 गेट लगा दिये हैं। एक गेट भी इस वित्तीय वर्ष में लगा दिया जाएगा। उन्होंने परवन परियोजना के कार्य में आयी बाधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से 2017 के बीच केन्द्रीय जल आयोग, वन एवं पर्यावरण की अंतिम स्वीकृति प्राप्त की जाकर एवं निविदा आमंत्रित करते हुए बांध एवं टनल का कार्यादेश जारी कर दिसम्बर 2017 से कार्य शुरू किया गया था।

श्री रावत ने बताया कि बांध की नींव की रॉक में फाल्ट लाइन आने से इसकी जांच एवं सुधारात्मक उपायों के कारण के साथ सीडब्ल्यूसी से अनुमोदन में लगभग 27 महीने की देरी हुई। बांध स्थल पर नदी में दो पहाड़ियों के बीच डायवर्जन के लिए स्थल न होने के कारण वर्षाकाल बाद भी लम्बे समय तक जल प्रवाह रहना एवं बांध स्थल के नीचे स्थित शेरगढ़ पिकअप वीयर के बैक वाटर से बांध निर्माण कार्य प्रभावित रहा। उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में सुधार एवं नहरें एवं डूब क्षेत्र की भूमि अवाप्ति प्रक्रिया पूर्ण करने में दो से तीन वर्ष का समय लगा। अनेक मामलों में विभिन्न न्यायिक प्रकरणों के निस्तारण, कोविड के प्रतिबंधों से कार्य प्रभावित रहे। साथ ही, खेतों में फसल होने के कारण पाइप लाइन बिछाने तथा नहर कार्य के लिए फरवरी से जून तक का सीमित समय ही मिला।

स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि स्वायत्त शासन विभाग प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अग्निशमन सेवाएं उपलब्ध कराता है। अब तक इस सेवा से वंचित सभी नगरीय निकायों में 4500 लीटर क्षमता तक के फायर वाटर टेंडर उपलब्ध कराये जाने की 2025-26 राज्य बजट में घोषणा की गयी। इस बाबत वित्त विभाग से सहमति के बाद प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है। आवश्यकता एवं उपयोगिता के आधार पर शीघ्र ही राज्य के शेष नगरीय निकायों में अग्निशमन वाहन उपलब्ध करवाये जा सकेंगे।

श्री खर्रा प्रश्नकाल में विधायक आदूराम मेघवाल के पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध अग्निशमन वाहनों से ग्रामीण क्षेत्र सेवा उपलब्ध करवाई जाती है। स्वायत्त शासन मंत्री चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल द्वारा प्रश्न काल में पूछे गये पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बाड़मेर शहर में अग्निशमन वाहन उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार एनडीआरएफ स्कीम के तहत अग्निशमन सेवाओं में सुधार के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय प्रस्ताव भिजवाया जा चुका है। 114.8 करोड़ रुपए के इस प्रस्ताव के स्वीकृत होने पर नवीन नगरीय निकायों में 28 अग्निशमन केन्द्र स्थापित होंगे, प्रत्येक अग्निशमन केन्द्र पर एक मिनी वाटर टेंडर अग्निशमन वाहन तथा सर्च एंड रेस्क्यू अग्निशमन वाहन की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही राज्य प्रशिक्षण केन्द्र के सुदृढ़ीकरण एवं क्षमता निर्माण के लिये बीए कैलोरी वर्चुअल रियल्टी ट्रेनिंग मॉड्यूल, लाइफ फायर ट्रेनिंग, रेस्क्यू किट फॉर ट्रेनिंग आदि के लिये 19.58 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भिजवाये गये हैं।

श्री खर्रा ने बताया कि आर्टिकुलेटिंग वाटर टॉवर उपकरणों, 5000 लीटर क्षमता के एडवांस वॉटर टेंडर, एडवांस मल्टीपरपज फायर टेंडर वाहन, अल्ट्रा लाइटवेट फाइ प्रेशर बेक-अप पंप, फर्स्ट रेस्पोंडर किट, एससीबीए सेट आदि की खरीद के लिए 176.23 करोड़ रुपये के प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भिजवाये गये हैं। इसके साथ ही जयपुर हेडक्वार्टर से सभी फायर स्टेशनों को जोड़ने के लिए 19.58 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भिजवाया जा चुका है। राज्य के नगरीय निकायों में उपलब्ध 10 एरियल हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म अग्निशमन वाहन हेतु 58.74 करोड़ रुपए की लागत से 18 हजार लीटर क्षमता के 30 वाटर बाउजर क्रय किये जाने के प्रस्ताव भी भिजवाये गये हैं।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने विधानसभा में हिंडोली-नैनवा पेयजल परियोजना को लेकर कहा कि जल जीवन मिशन की गाइडलाइन के अनुसार संवेदक को मार्च, 2024 तक 500 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण करने थे। इसके बावजूद लगभग 323 करोड़ रुपये के कार्य ही पूरे किये। वर्तमान सरकार ने इस पर सख्ती बरतते हुए छह करोड़ की पेनल्टी लगाने के साथ केविएट भी दायर की ताकि न्यायालय में स्थगन नहीं मिल सके।

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