जालौन , अक्टूबर 19 -- उत्तर प्रदेश के जालौन में सोमवार को पुलिस लाइन में आपदा के समय त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस लाइन उरई में संयुक्त आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक सुरेश चन्द्र रावत की उपस्थिति में एनडीआरएफ, जनपदीय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्यों का सजीव प्रदर्शन कर अपनी तैयारियों और आपसी समन्वय का प्रदर्शन किया।

मॉक ड्रिल में आपदा की सूचना मिलते ही संबंधित टीमों ने घटनास्थल की घेराबंदी कर मलबे और आपात स्थिति में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया। एनडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित किया। वहीं, अग्निशमन विभाग ने फायर ब्रिगेड की गाड़ियों, वाटर होज पाइप और सुरक्षा उपकरणों के माध्यम से आग पर काबू पाने का प्रदर्शन किया।

स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमों ने घायलों को मौके पर प्राथमिक उपचार देने, कार्डियक अरेस्ट अथवा सांस रुकने की स्थिति में सीपीआर देने तथा एंबुलेंस को अस्पताल तक शीघ्र पहुंचाने का अभ्यास किया। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग, रूट डायवर्जन और भीड़ प्रबंधन के जरिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा राहत वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का अभ्यास किया।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आपदा के दौरान शुरुआती मिनट यानी गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभागों के बीच समन्वय मजबूत करना, संसाधनों की कार्यक्षमता परखना और रिस्पॉन्स टाइम कम करना है, ताकि वास्तविक आपदा में अधिकतम लोगों की जान बचाई जा सके।

इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी, एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट, क्षेत्राधिकारी नगर राजीव शर्मा, क्षेत्राधिकारी कालपी राजेश कमल, क्षेत्राधिकारी लाइन सदानंद सहित मुख्य अग्निशमन अधिकारी मौजूद रहे। अभ्यास के समापन पर एसपी ने सभी टीमों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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