भोपाल , अक्टूबर 06 -- नवीन न्याय संहिताओं के प्रावधानों और अपराध की सूचना से लेकर न्यायालय के अंतिम निर्णय तक की प्रक्रिया को आमजन के लिए सरल एवं व्यावहारिक रूप में समझाने के उद्देश्य से बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में वैज्ञानिक अनुसंधान और फॉरेंसिक जांच के विभिन्न पहलुओं का सजीव प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शनी में अपराध स्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने, फॉरेंसिक प्रयोगशाला में उनका परीक्षण करने, रिपोर्ट तैयार करने और आगे की कानूनी कार्रवाई तक विभिन्न विशेषज्ञों और इकाइयों के समन्वय को सजीव मंचन के माध्यम से समझाया गया। मध्यप्रदेश में उपलब्ध मोबाइल फॉरेंसिक इकाइयों की भूमिका भी प्रदर्शित की गई। प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा अपराध स्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्यों के संग्रह, दस्तावेजीकरण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की प्रक्रिया दिखाई गई।
प्रदर्शनी में बताया गया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 176(3) के प्रावधानों के तहत निर्धारित गंभीर अपराधों में अपराध स्थल की जांच तथा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का विशेष महत्व है। अपराध स्थल पर उपलब्ध साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित करना और उनका दस्तावेजीकरण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत आधार प्रदान करता है।
सजीव प्रदर्शन में बताया गया कि अपराध स्थल पर मोबाइल फॉरेंसिक इकाई या फॉरेंसिक विशेषज्ञ वैज्ञानिक साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण और संग्रह करते हैं। अस्पताल में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ द्वारा पोस्टमार्टम किया जाता है, जिसमें मृत्यु के कारण, प्रकृति तथा अन्य चिकित्सकीय-कानूनी पहलुओं का परीक्षण किया जाता है। फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिक अधिकारी या फॉरेंसिक वैज्ञानिक जब्त साक्ष्यों का परीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करते हैं।
प्रदर्शनी में डीएनए, जीव विज्ञान, रसायन, विष विज्ञान, बैलिस्टिक्स, भौतिक विज्ञान और वॉयस एनालिसिस से संबंधित वैज्ञानिक परीक्षण प्रक्रियाओं को भी सरल तरीके से प्रदर्शित किया गया। ई-फॉरेंसिक 2.0 प्रणाली के माध्यम से फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने, उसके डिजिटल संधारण तथा पुलिस और न्यायालय को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
प्रदर्शनी में 'मुस्कान अभियान' के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रति पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। इसमें बच्चों के गुम होने की सूचना मिलने पर थाना पुलिस, जिला पुलिस, साइबर सेल, जीआरपी तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़ी इकाइयों द्वारा किए जाने वाले समन्वित प्रयासों को प्रदर्शित किया गया। तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से गुमशुदा बच्चों की तलाश तथा उन्हें सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी बताई गई।
बाल सुरक्षा से जुड़े गुड टच-बैड टच, पॉक्सो अधिनियम, साइबर सुरक्षा, बाल अधिकार, बाल विवाह, लैंगिक समानता और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार जैसे विषयों पर पुलिस द्वारा चलाए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी भी दी गई। महिला हेल्प डेस्क की भूमिका और महिलाओं को उपलब्ध कराए जाने वाले प्रथम संपर्क बिंदु के संबंध में भी जानकारी दी गई।
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों और युवा आगंतुकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। एक्सीलेंस कॉलेज भोपाल के फॉरेंसिक विषय के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फॉरेंसिक विज्ञान एवं अपराध अनुसंधान से जुड़े विषयों पर एफएसएल अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड़ से मार्गदर्शन प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने क्विज जोन में भाग लिया और डायल-112 की कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया। कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल के विद्यार्थियों ने पुलिस बैंड की प्रस्तुति का आनंद लिया। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अभियोजन और न्यायालय से जुड़ी गतिविधियों का अवलोकन कर न्यायिक प्रक्रिया को समझा।
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