वाराणसी , फरवरी 25 -- ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने विरुद्ध दर्ज मुकदमे की जांच प्रक्रिया पर बुधवार को गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया का एक पोस्ट दिखाते हुए कहा कि पुलिस की जांच के दौरान शिकायतकर्ता हिस्ट्रीशीटर स्वयं वहां उपस्थित है; यह कैसी निष्पक्ष जांच है?शंकराचार्य ने कहा, "हमने पुलिस अधिकारी की जो तस्वीर तथाकथित आशुतोष महाराज के साथ दिखाई है, वह स्वयं उनके सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई है। उस चित्र के नीचे 'जन्मदिन की हार्दिक बधाई' लिखा है। बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की गोपनीय जांच की जानकारी आशुतोष महाराज को कैसे हो रही है? यहां तक कि मेडिकल रिपोर्ट के तथ्यों की जानकारी भी उन्हें पहले ही मिल गई, जो पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में खड़ा करती है।"उन्होंने आगे कहा कि जब ये लोग पकड़े जाते हैं, तो साक्ष्यों को 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (एआई) द्वारा निर्मित बताने लगते हैं। काशी में जब मूर्तियां तोड़ी गईं, तब मुख्यमंत्री ने भी उन तस्वीरों को एआई जनित बताया था।
शंकराचार्य ने साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि मेरे अधिवक्ताओं के अनुसार, आरोप लगाने वाले दोनों बच्चे लंबे समय से तथाकथित महाराज के साथ ही रह रहे हैं। वे कभी हमारे पास नहीं रहे।
हमारे पास फोटो, वीडियो और दस्तावेजी प्रमाण हैं कि बच्चे उन्हीं के पास थे। चूंकि बच्चे नाबालिग हैं, इसलिए उनके साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए जा सकते, किंतु इन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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