श्रीनगर , सितंबर 15 -- लेह शीर्ष निकाय (एलएबी) सदस्य और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने पिछले साल लेह में पुलिस की गोलीबारी के पीड़ितों को लद्दाख प्रशासन की ओर से मिलने वाले मुआवज़े की आलोचना करते हुए कहा है कि मृतकों और घायलों के लिए घोषित रकम सुनकर उनका सर शर्म से झुक गया है।

लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर 2025 को पुलिस की गोलीबारी में मारे गये चार लोगों के परिजनों को रविवार को 15-15 लाख रुपए देने की घोषणा की। इसके साथ ही गंभीर रूप से घायल लोगों को तीन-तीन तथा मामूली रूप से घायल हुए प्रदर्शनकारियों को एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने घोषणा के बाद कहा कि मुआवज़ा भले ही अपने किसी करीबी को खोने का या जख्म का दर्द नहीं भर सकता, फिर भी प्रशासन दुख से उभरने की कोशिश कर रहे परिवारों के साथ खड़ा है।

श्री वांगचुक ने इस मुआवज़े पर कहा कि प्रदर्शनकारियों की मौत की परिस्थितियों को देखते हुए यह मुआवज़ा बहुत कम है। उन्होंने कहा, "मुआवज़े को देखते हुए मैं बहुत ख़ुश नहीं हूं, बल्कि मेरा सर शर्म से झुक गया है।" उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक वीडियो में कहा कि मरने वालों में ज्यादातर निहत्थे थे, सड़कों पर चल रहे थे और मुसाफिर थे।

श्री वांगचुक ने कहा, "उनके सिरों पर, सीनों पर और पैरों पर गोली मारी गयी, बिना किसी आदेश के। पुलिसकर्मियों को गोली चलाने का आदेश नहीं मिला था, फिर भी उन्हें एके-47 से गोली मारी गयी। सिर्फ पैरों में नहीं, बल्कि सिर और सीने में। यह हत्या थी। अगर गोलीबारी की घटना की जांच करने वाले न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती तो सच सामने आ जाता, लेकिन वह रिपोर्ट भी दबायी जा रही है। एक साल हो गया है और सच सामने नहीं है।"गृह मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बीएस चौहान को 24 सितंबर 2025 की घटना में हिंसा की न्यायिक जांच करने के लिए नियुक्त किया था। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गयी थी। यह हिंसा लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा तथा संवैधानिक गारंटी मांगने वाले प्रदर्शन के दौरान हुई थी। आयोग ने अपनी जांच 27 अक्तूबर 2025 को शुरू की। श्री वांगचुक ने लद्दाख के प्रदर्शन की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से करते हुए कहा कि एक ओर जहां पेलेट गन के इस्तेमाल के बाद गृह मंत्री का इस्तीफा मांगा गया था, वहीं लद्दाख में गंवाई गयी जानों की कीमत बहुत कम नज़र आती है।

श्री वांगचुक ने कहा कि देश को "लद्दाख के समर्थन में खड़ा होना" चाहिए क्योंकि मारे गये लोगों में से कुछ पूर्व सैनिक थे जिन्होंने कारगिल युद्ध में लड़ाई लड़ी थी।

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