, April 7 -- नगर आयुक्त बताते हैं कि शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत दो प्रमुख पहलुओं पर कार्य किया गया है। पहला अर्बन फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम जो नागरिकों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए चेतावनी और वास्तविक समय पर सूचना उपलब्ध कराता है। दूसरा डिसीजन सपोर्ट सिस्टम जो शहर के लिए दीर्घकालिक योजना और नीति निर्माण में सहायता प्रदान करता है ताकि भविष्य में बाढ़ प्रबंधन क्षमताओं को अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाया जा सके।

गोरखपुर मॉडल का यह समग्र दृष्टिकोण शहर को न केवल वर्तमान आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाता हैए बल्कि भविष्य में जनहानि एवं धनहानि के खतरे को भी कम करता है। इस परियोजना के अंतर्गत शहर के सभी महत्त्वपूर्ण नालोंए सभी उपकरणों तथा सभी जिम्मेदार अधिकारियों एवं टीमों को उनके संपर्क विवरण सहित मैप किया गया है। शहर में कुल 28 जलभराव हॉटस्पॉट और 85 पॉइंट्स ऑफ इंटरेस्ट चिह्नित किए गए हैं जो जलभराव की दृष्टि से अधिक संवेदनशील हैं। शहर के सभी पंपिंग स्टेशनों का पूर्ण ऑटोमेशन किया गया है। 24ग7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है जो लगातार निगरानी और समन्वय का कार्य करता है। नागरिकों के लिए ग्रीवांस पोर्टल तैयार किया गया है जिससे किसी भी समस्या की सूचना और उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में नगर निगम द्वारा दो ऑटोमैटिक रेन गेज भी लगाए गए हैं जो हर 15 मिनट पर बारिश से जुड़ी जानकारी देते हैं। प्राइमरी व सेकंडरी नालों पर कुल 110 ऑटोमैटिक वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं। ये सेंसर हर 2 से 15 मिनट में जलस्तर से संबंधित सूचनाएं भेजते हैं। जब नालों में जलस्तर 80 प्रतिशत से अधिक हो जाता है तो संबंधित अधिकारियों को ऑटोमेटेड अलर्ट्स पहुंचने लगते हैं। जब सम्प वेल्स में जलस्तर 60 प्रतिशत से अधिक होता है, ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से पंप स्वतः चालू हो जाते हैं। ईंधन की कमी और पंप के रखरखाव से संबंधित चेतावनियां भी अधिकारियों को समय रहते मिल जाती हैं।

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