उज्जैन , जून 30 -- मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने मंगलवार को कहा कि पुराने विचारों, संस्कारों और संस्कृति को विकसित कर ही विकसित भारत का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा का वैश्विक केंद्र रहा है तथा नई शिक्षा नीति देश को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है।
राज्यपाल महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधियां और पदक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि एक समय विश्व के अनेक देशों से विद्यार्थी भारत में शिक्षा ग्रहण करने आते थे, जबकि आज भारतीय विद्यार्थियों का विदेशों की ओर रुख बढ़ा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के साथ ऐसी परिस्थितियां बनानी होंगी कि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की आवश्यकता न पड़े।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान परंपरा को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने का अवसर दिया है। विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ करें।
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता और प्रकृति के प्रति सम्मान के संस्कार भी दिए जाने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन में ज्ञान, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने तथा माता-पिता के प्रति सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की शिक्षा जगत से अनेक अपेक्षाएं हैं। अच्छे संस्कारों से ही संस्कृति का संरक्षण संभव है और संस्कृत भाषा विश्व के प्राचीन ज्ञान को समझने का प्रमुख माध्यम है। इसलिए नई पीढ़ी को संस्कृत और भारतीय परंपराओं का ज्ञान अवश्य होना चाहिए।
समारोह में विश्वविद्यालय ने 21 विद्यार्थियों को पीएचडी सहित कुल 1303 उपाधियां प्रदान कीं। इसके अलावा 42 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए, जिनमें 16 स्वर्ण, 13 रजत और 13 कांस्य पदक शामिल हैं।
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