नयी दिल्ली , अक्टूबर 22 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राज्यों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों की पहचान कर उन्हें बदलने या निरस्त करने का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा कि विधिक सुधार बदलते समय के अनुरूप होने चाहिए, ताकि सुशासन को बढ़ावा मिले और आम लोगों का जीवन आसान हो।

श्री राधाकृष्णन ने गुरुवार को यहां भारतीय विधि आयोग की ओर से आयोजित 'सहकारी संघवाद और विधिक सुधार : राष्ट्रीय एवं राज्य परिप्रेक्ष्य' सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में औपनिवेशिक काल के तीन आपराधिक कानूनों की जगह नये कानून लाना और 1,700 से अधिक पुराने कानूनों को खत्म करना भारतीय विधि व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने राज्य विधि आयोगों से पुराने कानूनों की समीक्षा कर उनमें बदलाव या उन्हें निरस्त करने की सिफारिश करने को कहा।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत विविधता में एकता है। संविधान केंद्र और राज्यों की शक्तियों, जिम्मेदारियों और राज्यों की वैध स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाता है। सहकारी संघवाद का अर्थ हर मामले में एक जैसे नियम बनाना नहीं है। जहां केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारियां एक-दूसरे से जुड़ी हों, वहां दोनों को मिलकर काम करना चाहिए और राज्यों की जरूरतों के अनुसार फैसले लेने की स्वतंत्रता भी बनी रहनी चाहिए।

श्री राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'टीम इंडिया' की सोच केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत, तालमेल और साझा जिम्मेदारी पर आधारित है। राजनीतिक मतभेदों को जनहित में मिलकर काम करने के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए मजबूत कानून, पारदर्शी संस्थाएं, कुशल प्रशासन और सभी को न्याय मिलना जरूरी है।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय विधि आयोग, राज्य विधि आयोगों और राज्य विधि विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके लिए राज्यों के बीच विचार-विमर्श, अच्छे कामकाज के तरीकों को साझा करने और पुराने कानूनों की नियमित समीक्षा करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कानून का अंतिम उद्देश्य हर नागरिक के लिए न्यायपूर्ण, सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है।

इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भारतीय विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, सदस्य-सचिव डॉ. अंजू राठी राणा और आयोग के सदस्य प्रो. डी. पी. वर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

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