पुणे , मई 04 -- बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध धम्म संध्या समारोह के भाग के रूप में पुणे में 'रथ भीमाचा हा पुधे नेउ' नामक एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
भावपूर्ण ग़ज़लों एवं गीतों के माध्यम से कलाकारों ने भगवान बुद्ध और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और मानवता, समानता एवं करुणा के उनके संदेश को उजागर किया। यह कार्यक्रम सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के अंतर्गत तथागत गौतम बुद्ध विहार में सोमवार को आयोजित किया गया जिसे दर्शकों से भरपूर सराहना मिली।
वंदितो तुला मि गौतम, मुक्ति दिन हा मनावतेचा, संगा बहुजनस आता सांपला वनवास, और चंदन वृक्ष समान होता भीमराव जैसे गीतों ने दोनों महान व्यक्तित्वों के योगदान और एक समान समाज के निर्माण के लिए उनके दृष्टिकोण को खूबसूरती से चित्रित किया।
दिग्गज ग़ज़ल गायक अशोक गायकवाड़ ने साथी कलाकारों के साथ मिलकर भगवान बुद्ध की करुणा और अंबेडकर के सामाजिक न्याय के आदर्शों को समर्पित एक भावपूर्ण संगीतमय श्रद्धांजलि प्रस्तुत की।
कार्यक्रम की शुरुआत 'तथागत तुझ धम्म आचरणी' गीत से हुई। 'हृदयी वासे माझ्या बुद्ध पिंपलाचा पार', 'भीम तुझ्या कृपा ने जगने झाले सोप' और 'अंधर्मय नभात उजलुं भीम गेला' सहित अन्य प्रस्तुतियों ने माहौल को भावपूर्ण बना दिया। एक विज्ञप्ति के अनुसार, "भीम सरका हीरा अलौकिक जगत दूसरा कोनेच नहीं" पंक्ति को दर्शकों से जोरदार तालियां मिलीं।
इस कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष और पूर्व उपमहापौर परशुराम वाडेकर, पूर्व उपमहापौर सुनीता वाडेकर, संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस.एन.पठान और नगरसेवक सनी निम्हन सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
संगीत में निखिल वाघमारे ने तबला, श्याम चंदनशिव ने ढोलक, अवधूत धायगुडे ने साइड रिदम, अमोल मंधारे ने कीबोर्ड, अजरुद्दीन शेख ने बांसुरी और रूपेश मोरे ने हारमोनियम पर संगत दी। कार्यक्रम का संचालन धम्मचारिणी गुणमेघा ने किया जबकि दीपक म्हस्के ने कार्यक्रम का संचालन किया।
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