पुणे , अगस्त 31 -- गणेशोत्सव का त्योहार नज़दीक आ रहा है और महाराष्ट्र के पुणे में तेज़ आवाज़ वाले डीजे, लेज़र लाइट और प्लाज़्मा सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ गयी है।

इस बहस ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) के मतभेद भी उजागर कर दिये हैं। पार्टी के शहर अध्यक्ष धीरज घाटे ने गणेश मंडलों का पुरज़ोर समर्थन करते हुए बिना किसी प्रशासनिक दबाव के त्योहार मनाने की वकालत की है। वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग बढ़ते शोर-शराबे और आम लोगों को होने वाली परेशानी को लेकर चिंता जता रहे हैं।

राजनीतिक हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की तीखी टिप्पणियों के बाद यह विवाद और बढ़ गया है। कोथरुड की नेता एवं सांसद मेधा कुलकर्णी ने सोमवार को कहा कि व्यक्तिगत आज़ादी दूसरों की शांति के अधिकार का उल्लंघन करके नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि चाहे डीजे हो या पारंपरिक वाद्ययंत्र, अत्यधिक शोर से नागरिकों को परेशानी होती है।

इसी तरह की चिंता ज़ाहिर करते हुए नारायण पेठ के निवासी विद्यानंद बापट ने कहा कि धार्मिक आज़ादी की आड़ में शोर-शराबे और यातायात जाम जैसी समस्याओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी आयोजनों के लिए एक जैसे नियम लागू करने की मांग की।

जब स्थानीय प्रशासन सांस्कृतिक उत्साह और नागरिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, तो यह बहस महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी में कान फाड़ देने वाले शोर के ख़िलाफ़ बढ़ती नाराज़गी को भी दिखाती है।

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