पुड्डुचेरी , मार्च 20 -- केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में सत्तारुढ़ ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) राजनीतिक उथल-पुथल से बच गया और शुक्रवार को सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर समझौता हो गया।

समझौते के अनुसार, एईएनआरसी कुल 30 विधानसभा सीटों में से 16 पर चुनाव लड़ेगी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दस सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। और अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक मुन्नेत्र कषगम (अन्ना द्रमुक) और नवगठित 'लक्ष्य जननायगा काची' (एलजेके) को क्रमशः आवंटित की गईं। एलजेके को गठबंधन में शामिल करने के प्रस्ताव का मुख्यमंत्री एवं एआईएनआरसी के संस्थापक-अध्यक्ष एन. रंगासामी ने कड़ा विरोध किया था।

अब श्री रंगासामी ने अचानक अपना रुख नरम कर लिया। इससे पहले उन्होंने धमकी दी थी कि अगर उनकी दो मुख्य मांगें नहीं मानी गईं तो वे गठबंधन तोड़ देंगे। उन्होंने गठबंधन को टूटने से बचाने की कोशिश कर रही भाजपा को भी दो बार झटक दिया था। उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया के नेतृत्व वाले भाजपा प्रतिनिधिमंडल से मिलने से दो बार इनकार कर दिया था और गुस्से में पुड्डुचेरी छोड़कर चले गए थे, लेकिन अब सभी मुद्दे सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिए गए और सीटों के बंटवारे के समझौते पर हस्ताक्षर हो गए, जिससे भाजपा ने बड़ी राहत की सांस ली।

श्री रंगासामी की दो मुख्य मांगें थीं और दो सीटों से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था, जिससे यह साफ़ संकेत मिल गया था कि एआईएनआरसी चुनाव में अकेले ही उतरेगी। इन मांगों में एलजेके को राजग में शामिल न करना और यथास्थिति बनाए रखना शामिल था, यानी उन्हीं सहयोगियों के साथ बने रहना जिनके साथ राजग ने 2021 का चुनाव लड़ा था। इसके अलावा, उन्होंने पुड्डुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की लंबे समय से लंबित मांग को तुरंत पूरा करने की भी मांग की थी।

श्री रंगासामी के रुख में अचानक आए बदलाव आए और एलजेके को राजग में शामिल करने पर सहमति जता दी। उन्होंने एनआर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान का रास्ता खोल दिया, और राजग की नैया को डूबने से बचा लिया।

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