भोपाल , अप्रैल 14 -- भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के साथ कार्य कर रहे भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ, भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा और भोपाल ग्रुप फॉर इन्फोर्मेशन एंड एक्शन ने पीथमपुर स्थित रामकी अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में कचरा प्रबंधन के नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता की कमी को लेकर स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों की कड़ी निंदा की है।

जारी प्रेस विज्ञप्ति में संगठनों ने आरोप लगाया कि हालिया विस्फोट के वास्तविक कारणों की जानकारी पीथमपुर के लोगों और आम जनता के साथ साझा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी में यह संकेत मिला है कि संयंत्र के एक लैंडफिल से रिसाव हो रहा है, जिससे नदियों और यशवंत सागर बांध के जल के प्रदूषित होने की आशंका है।

संगठनों ने बताया कि पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया और पूर्व गैस राहत मंत्री बाबूलाल गौर ने भी अतीत में यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे को इस संयंत्र में भेजे जाने पर आपत्ति जताई थी। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार लगभग 350 मीट्रिक टन खतरनाक कचरे के दहन के बाद उत्पन्न 900 मीट्रिक टन विषाक्त अवशेष में पारा सहित अन्य भारी धातुओं की उच्च मात्रा मौजूद है, जिसे संयंत्र परिसर में ही दबा दिया गया है। इससे दीर्घकालिक पर्यावरण और जनस्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है।

संगठनों ने चेतावनी दी कि वर्तमान स्थिति पीथमपुर में "धीमे भोपाल" जैसी परिस्थिति का संकेत देती है, जहां खतरनाक कचरे के असुरक्षित प्रबंधन और पारदर्शिता की कमी के कारण समुदायों को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने मांग की कि संबंधित अधिकारी सभी जानकारियां सार्वजनिक करें, जवाबदेही सुनिश्चित करें तथा रासायनिक दुर्घटना से संबंधित नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।

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