श्रीनगर , अगस्त 27 -- जम्मू-कश्मीर में बिजली की दरों में हाल ही में 6.83 प्रतिशत बढ़ोतरी के विरोध में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने गुरुवार को कश्मीर में कई जगहों पर प्रदर्शन किया और बढ़ी हुई दरों को तुरंत वापस लेने तथा घरों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने के सरकार के वादे को पूरा करने की मांग की।
पीडीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां, बडगाम, कुपवाड़ा और त्राल में प्रदर्शन किये। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस की अगुवाई वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह ऐसे समय में उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाल रही है जब वे पहले से ही बढ़ती कीमतों एवं आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं।
कुलगाम में विरोध प्रदर्शन की अगुवाई पीडीपी के उपाध्यक्ष मोहम्मद सरताज मदनी ने की जबकि शोपियां में ज़िला अध्यक्ष एजाज़ अहमद मीर और राजा वहीद ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। बड़गाम में पीडीपी विधायक आगा मुंतज़िर ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की। अनंतनाग, कुपवाड़ा और त्राल से भी इसी तरह के प्रदर्शनों की रिपोर्टें हैं।
ये विरोध प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर में 2026-27 के लिए बिजली की दर में औसतन 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संयुक्त बिजली नियामक आयोग की मंजूरी के बाद हुए। संशोधित दर एक सितंबर से लागू होने वाले हैं और 31 मार्च, 2027 तक लागू रहेंगे।
पीडीपी ने इस बढ़ोतरी को जन-विरोधी बताते हुए कहा है कि इससे विशेषकर गरीब एवं मध्यम-वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पार्टी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने के चुनावी वादे को लेकर भी सरकार से सवाल किया है और कहा कि इसके बजाय उपभोक्ताओं को बिजली के ऊंचे बिलों का सामना करना पड़ रहा है।
पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि घाटी के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि पुलिस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले रही है और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे लोगों पर बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि जो सरकार 200 यूनिट मुफ़्त बिजली देने का वादा करके सत्ता में आयी थी उसने इसके बजाय उपभोक्ताओं पर लगभग सात प्रतिशत का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
पीडीपी ने मांग की है कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और उपभोक्ताओं, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत दे।
बिजली दर में बढ़ोतरी की अन्य विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हालांकि इस फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि बढ़ोतरी बहुत कम की गयी है और उनकी सरकार ने कभी यह वादा नहीं किया था कि बिजली की दरें नहीं बढ़ायी जायेंगी।
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