श्रीनगर , जुलाई 28 -- पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने एक प्रस्ताव पारित कर अनुच्छेद 370 को हटाये जाने की वर्षगांठ पर पांच अगस्त को जिला स्तरीय और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इसके साथ ही पार्टी ने जम्मू -कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे और अन्य संवैधानिक सुरक्षा उपायों की बहाली की अपनी मांग को भी दोहराया है।

पार्टी ने मंगलवार को अपने 27वें स्थापना दिवस समारोह में पारित इस प्रस्ताव में पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया । इस अवसर पर जम्मू -कश्मीर के लोगों के अधिकारों, पहचान एवं आकांक्षाओं की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।

पार्टी ने जम्मू -कश्मीर की वर्तमान स्थिति को इसके समकालीन इतिहास का सबसे कठिन दौर बताया और अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35ए तथा अन्य संवैधानिक गारंटियों की बहाली के लिए अपना संवैधानिक संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी लिया । पीडीपी ने घोषणा की कि पांच अगस्त को जिला स्तर और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के रूप में मनाया जायेगा।

प्रस्ताव में राजनीतिक बंदियों और हिरासत में लिए गये लोगों की तत्काल रिहाई, निवारक हिरासत कानूनों के दुरुपयोग को समाप्त करने और उन नागरिक क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की धीरे-धीरे वापसी की मांग भी की गयी जहां आतंकवाद में काफी कमी आयी है। पार्टी ने पारंपरिक रास्तों और नियंत्रण रेखा के पार के मार्गों को फिर से खोलने, मुजफ्फराबाद और रावलकोट मार्गों के जरिये एलओसी के पार व्यापार को पुनर्जीवित करने और जम्मू -कश्मीर को दक्षिण एवं मध्य एशिया को जोड़ने वाले प्रवेश द्वार के रूप में बदलने के उपायों का आह्वान किया।

पीडीपी ने जम्मू -कश्मीर के प्राकृतिक संसाधनों में उचित हिस्सेदारी की मांग की। इसके तहत केंद्र से केंद्र शासित प्रदेश को कम से कम दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के हस्तांतरण या पर्याप्त मुआवजे देने की मांग की गयी। प्रस्ताव में पीर पंजाल और चिनाब घाटी के लिए अलग मंडलीय प्रशासनिक इकाइयों की पार्टी की मांग को दोहराया गया। पीडीपी ने एक लाख से अधिक सरकारी रिक्त पदों को भरने के लिए एक पारदर्शी एवं योग्यता-आधारित भर्ती अभियान चलाने की मांग भी की।

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