जयपुर , अगस्त 08 -- डेब्ट्स रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल (डीआरएटी) दिल्ली के चेयरपर्सन डॉ. जस्टिस सुधीर कुमार जैन ने पीड़ितों को न्याय दिलाने और प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण के लिए पीठ और बार एसोसिएशन के बीच समन्वय जरूरी बताते हुए कहा है कि किसी न्यायिक संस्था की प्रभावशीलता बढ़ाने में पीठ, बार और संबंधित संस्थानों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ जैन शनिवार को यहां ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) बार एसोसिएशन जयपुर की ओर से शनिवार को यहां विशेष संवाद और सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे। उन्होंने उमामलों के प्रभावी निस्तारण, वैकल्पिक विवाद समाधान, लोक अदालतों तथा बार और अन्य हितधारकों के सहयोग से किए गए प्रयासों को सकारात्मक बताया। उन्होंने डीआरटी जयपुर के पीठासीन अधिकारी विमल गुप्ता द्वारा न्यायिक प्रशासन और संस्थागत कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।
इस दौरान डीआरटी और डीआरएटी से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया, अधिवक्ताओं के पेशेवर व्यवहार, वैकल्पिक विवाद समाधान, संस्थागत सहयोग और युवा अधिवक्ताओं की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। अधिवक्ताओं को सीधे सवाल पूछने और डॉ. जस्टिस जैन के न्यायिक अनुभव से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर भी मिला।
कार्यक्रम में डीआरटी जयपुर की संस्थागत यात्रा और पीठासीन अधिकारी विमल गुप्ता के कार्यकाल के दौरान किए गए विभिन्न प्रयासों को समर्पित विशेष प्रकाशन 'रीइमैजिनिंग रिकवरी, रिइनफोर्सिंग जस्टिस - ए जर्नी ऑफ रिफॉर्म, इनोवेशन एंड जस्टिस' का भी अनावरण किया गया।
प्रकाशन में डीआरटी जयपुर में न्यायिक प्रशासन, तकनीक के उपयोग, लोक अदालतों, वैकल्पिक विवाद समाधान, युवा अधिवक्ताओं की भागीदारी, बार-बेंच सहयोग तथा बैंकों, एनबीएफसी, एचएफसी और एआरसी की सहभागिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।
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