पटियाला , मई 22 -- पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने पंजाब सरकार और विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पावर सेक्टर के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों के खिलाफ कथित तौर पर की जा रही 'टारगेटेड कार्रवाई' का विरोध किया है। एसोसिएशन ने पूर्व मुख्य प्रबंध निदेशक के डी चौधरी और सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता संजीव प्रभाकर की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा कि 15 साल पुराने मामले में जिस तरीके से पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्रवाई कर रहा है, वह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का हिस्सा नहीं लगता।
एसोसिएशन के महासचिव अजय पाल सिंह अटवाल ने शुक्रवार को कहा कि संगठन किसी भी भ्रष्टाचार के दोषी व्यक्ति का समर्थन नहीं करता, लेकिन यदि वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जाता है, तो इससे पूरे इंजीनियरिंग समुदाय का मनोबल टूटता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दर्ज एफआईआर बेहद अस्पष्ट और खुली प्रकृति की है, जिससे यह प्रतीत होता है कि मामला किसी अन्य उद्देश्य से प्रेरित होकर दर्ज किया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों से पावर सेक्टर के अधिकारियों में भय, असुरक्षा और निराशा का माहौल पैदा हो रहा है, जिसका असर बिजली संस्थानों के कामकाज पर पड़ेगा।
पत्र में यह भी कहा गया कि मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड पिछले पांच वर्षों से विजिलेंस विभाग के पास उपलब्ध थे। यदि विभाग गंभीरता से जांच कर रहा होता, तो अब तक चार्जशीट दाखिल की जा सकती थी। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि स्वयं विवादों में घिरे विजिलेंस विभाग द्वारा अपनी छवि बचाने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है ताकि जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
एसोसिएशन ने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी मौजूदा या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाये, ताकि निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो। इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति की आपात बैठक भी बुलाई गयी है।
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