चंडीगढ़ , सितंबर 17 -- पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव के.बी.एस. सिद्धू ने पंजाब भूमि परिरक्षण अधिनियम (पीएलपीए), 1900 के तहत सूची से हटाई गई (डीलिस्ट) भूमि पर वन मंजूरी से जुड़े मामलों के लिए मंत्रिपरिषद से स्वीकृत एकीकृत सर्कुलर जारी करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग की हालिया मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में चेकलिस्ट उपलब्ध कराने के बावजूद विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समस्या बनी हुई है।
श्री सिद्धू ने गुरुवार को कहा कि 14 सितंबर को जारी एसओपी में पीएलपीए के बंद और खुले क्षेत्रों से संबंधित मामलों के लिए 13 शर्तें निर्धारित की गई हैं। उन्होंने एसओपी में सार्वजनिक चेकलिस्ट, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विधिवत एनओसी और जल निकायों से संबंधित वन मंडल अधिकारी की रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाओं का स्वागत किया। उन्होंने आठ सितंबर के उस आदेश का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 50 रुपए प्रति वर्ग मीटर ग्रीनिंग पंजाब मिशन शुल्क स्टेज-1 स्वीकृति के बाद लेने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि एसओपी के तहत स्वीकृत भवन नक्शा, भू-उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) प्रमाणपत्र और मास्टर प्लान संबंधी प्रमाणन मांगा जाता है, जबकि संबंधित शहरी निकाय और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) कई मामलों में वन विभाग की राय की प्रतीक्षा करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण, आवास एवं शहरी विकास, स्थानीय सरकार, राजस्व तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग मिलकर एक ऐसा सर्कुलर तैयार करें, जो सभी संबंधित विभागों पर लागू हो।
पूर्व मुख्य सचिव के प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक डीलिस्ट खसरे को चार श्रेणियों में वर्गीकृत कर संबंधित नियामक प्राधिकरण तय किया जाए, सभी विभागों के लिए एक समान 'खसरा स्थिति प्रमाणपत्र' जारी हो और निर्णयों के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा सर्कुलर वर्ष 2009 में डीलिस्टिंग के साथ केंद्र द्वारा लगाई गई शर्तों या न्यायालय के आदेशों में बदलाव नहीं कर सकता।उन्होंने पंजाब सरकार से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से यह स्पष्टीकरण लेने का भी सुझाव दिया कि शहरी सीमाओं के भीतर डीलिस्ट आबादी वाली भूमि पर मालिक का अपना घर संबंधित स्वीकृति के दायरे में आता है या नहीं। साथ ही उन्होंने महाधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय में आवेदन दायर करने का सुझाव दिया।
श्री सिद्धू ने नयागांव नगर परिषद के अंतर्गत कांसल, करोरां और नाडा के हिस्सों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में कई परिवार वर्षों से भवन नक्शे की मंजूरी और सीवर कनेक्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने करोरां और नाडा के पहले से बसे शहरी हिस्सों से सीमांकन शुरू करने, मौजूदा घरों को न्यायालय की अनुमति के अधीन पानी और सीवर कनेक्शन उपलब्ध कराने तथा पंजाब सुखना इको-सेंसिटिव जोन को अंतिम रूप देने का सुझाव दिया। उन्होंने ये सुझाव मुख्य सचिव और संबंधित प्रशासनिक सचिवों को 16 सितंबर के पत्र के माध्यम से भेजे हैं।
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