जयपुर , मई 12 -- राजस्थान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तीसरे चरण में लगभग 8 हजार 584 किलोमीटर की 912 सड़कों के कार्य पूर्ण किए गए हैं वहीं योजना के चौथे चरण के तहत प्रदेश को एक हजार 216 सड़कों की स्वीकृति मिली है जो संख्या की दृष्टि से अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राजस्थान में पीएमजीएसवाई के तीसरे चरण में मुख्य मार्गों एवं प्रमुख संपर्क ग्रामीण मार्गों के उन्नयन कार्यों के माध्यम से कृषि मंडियों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच को अत्यधिक सुगम एवं सरल बनाया गया है। ग्रामीण संपर्क को मजबूत आर्थिक नेटवर्क का रूप प्रदान करने में परिवर्तनकारी रहे इस चरण की अवधि को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2025 से आगे बढ़ाकर मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। साथ ही योजना का संशोधित कुल वित्तीय परिव्यय 83 हजार 977 करोड़ रुपये भी निर्धारित किया है।
योजना की समयावधि बढ़ाए जाने से निर्धारित सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को सेचुरेशन स्तर तक ले जाया जा सकेगा तथा ग्रामीण बस्तियों को कृषि मंडियों, अस्पतालों से जोड़ने वाले थ्रू रूट्स और प्रमुख ग्रामीण लिंक का व्यापक सुदृढीकरण होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'सशक्त गांव, विकसित भारत' के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के गांवों को आत्मनिर्भर एवं विकसित बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। ग्रामीण परिदृश्य में बड़ा बदलाव लाने की इस कड़ी में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भी एक सशक्त माध्यम बन रही है।
केन्द्र सरकार ने इस योजना के चौथे चरण के तहत वर्ष 2024-25 से 2028-29 के दौरान देशभर में 62 हजार 500 किलोमीटर सड़क निर्माण के लक्ष्य के साथ कुल 70 हजार 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस चरण में 2011 की जनसंख्या के मानदंडों के आधार पर अलग-थलग पड़ी ग्रामीण बस्तियों को ऑल वेदर सड़क संपर्क प्रदान किया जाएगा जो अभी तक सड़क संपर्क से वंचित थी। इसमें विशेष श्रेणी के क्षेत्रों - जनजातीय (पांचवीं अनुसूची) क्षेत्र, आकांक्षी जिले-ब्लॉक और मरुस्थलीय क्षेत्र पर जोर दिया गया है।
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