चेन्नई , जून 24 -- अन्य पिछड़ा वर्ग-वन्नियार बहुल और वैचारिक रूप से दो फाड़ हो चुकी पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के प्रथम परिवार में लंबे समय से चले आ रहे मतभेद अब समाप्त होते दिख रहे हैं।

पिता-पुत्र ने अपने पुराने विवाद को भुला दिया है तथा पार्टी संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने अपनी शादी की 61वीं वर्षगांठ पर अपने बेटे अंबुमणि का आंसू भरी आंखों से गले लगाकर स्वागत किया।

परिवार में यह सुलह यहां से लगभग 125 किलोमीटर दूर विल्लुपुरम जिले के तिंदिवनम स्थित रामदास के थाइलापुरम आवास पर हुई, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान राज्यसभा सदस्य अंबुमणि अपनी पत्नी श्रीमती सौम्या-जो तमिलनाडु विधानसभा में धर्मपुरी का प्रतिनिधित्व करने वाली विधायक हैं-और अपने परिवार के सदस्यों के साथ इस अवसर पर उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे।

श्री अंबुमणि जैसे ही अपनी कार से उतरे और घर के भीतर प्रवेश किया, वहां बेहद भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिले। अस्सी वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग श्री रामदास ने अपने बेटे को कसकर गले लगा लिया और दोनों ही रो पड़े। श्रीमती सौम्या सहित दोनों पक्षों के परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गईं, जो यह संकेत था कि अब पिता और पुत्र के बीच कोई कड़वाहट नहीं बची है।

श्री अंबुमणि और उनकी पत्नी ने वरिष्ठ रामदास के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया तथा अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ समय बिताने के बाद राज्यसभा सांसद चेन्नई के लिए रवाना हो गये।

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या पिता और पुत्र फिर से एक हो गए हैं, तो श्री अंबुमणि ने संक्षिप्त जवाब दिया, "अब से सब अच्छा ही होगा।"परिवार में मतभेद 2025 में उस समय सामने आए थे जब श्री अंबुमणि ने श्री रामदास की अध्यक्षता में हुई पार्टी की एक बैठक में अपने भतीजे को युवा विंग का नेता बनाने का खुलकर विरोध किया था। इससे सार्वजनिक रूप से विवाद बढ़ गया और बेटा गुस्से में बाहर निकल गया। उन्होंने अपने समर्थकों से चेन्नई में ईसीआर पर स्थित अपने पनायुर आवास पर मिलने को कहा और अपना संपर्क नंबर भी साझा किया था। तभी से पिता-पुत्र की इस जोड़ी के बीच की दूरी बढ़ने लगी थी, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए और श्री रामदास तो यहां तक कह गए कि उन्होंने 35 वर्ष की आयु में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाकर एक गंभीर गलती की थी। श्री रामदास ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने बेटे पर तीखा हमला भी किया था और उन पर भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था।

श्री रामदास के इस गुस्से और श्री अंबुमणि तथा उनकी पत्नी श्रीमती सौम्या पर गंभीर आरोप लगाने के बाद दोनों के बीच की दरार एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई थी जहां से वापसी मुमकिन नहीं लग रही थी। शीर्ष नेताओं द्वारा दोनों को एक साथ लाने के बार-बार किए गए प्रयास विफल होने के बाद, पार्टी दो हिस्सों में बंट गई और दोनों गुटों ने विरोधी समर्थकों को बर्खास्त कर दिया तथा उन पदों पर अपने पक्ष के लोगों को नियुक्त कर दिया था।

दोनों अपने-अपने गुट का नेतृत्व कर रहे थे और श्री अंबुमणि ने एक आम परिषद बुलाई तथा पार्टी अध्यक्ष के रूप में अपने चुनाव की पुष्टि करवायी। उन्हें मतभेद शुरू होने से पहले इस पद पर पदोन्नत किया गया था और उम्मीद के मुताबिक उनके पिता ने इस पर आपत्ति जतायी, जिन्होंने अपने पक्ष की भी आम परिषद की बैठक बुलाई और कहा कि एक संस्थापक के रूप में पार्टी पर उनका पूरा नियंत्रण है और उन्होंने अपने बेटे द्वारा लिए गए निर्णय को अमान्य कर दिया था।

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