हरिद्वार , सितंबर, 26 -- । पितरों के प्रति श्रद्धा, आस्था और कृतज्ञता का प्रतीक पितृ पक्ष शनिवार से शुरू हो गया। इसके साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार के प्राचीन नारायणी शिला मंदिर में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु विधि-विधान के साथ अपने पितरों का श्राद्ध कर उनकी आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।

हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर को पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म के लिए प्रमुख तीर्थ माना जाता है। मान्यता है कि हरिद्वार, गया और बद्रीनाथ में श्राद्ध करने का विशेष धार्मिक महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु और गयासुर से जुड़ी कथा में नारायणी शिला के तीन खंडों का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इसका कपाल बद्रीनाथ, मध्य भाग हरिद्वार और चरण गया में स्थित हैं। इसी धार्मिक महत्ता के चलते पितृ पक्ष के दौरान नारायणी शिला मंदिर में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि महालय पक्ष की 16 दिनों की अवधि पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष अवसर है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में पितर अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध और तर्पण को स्वीकार करते हैं तथा उन्हें सुख-समृद्धि और संतान का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि पितरों की मृत्यु की जिस तिथि का ज्ञान हो, उसी तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए। यदि मृत्यु तिथि की जानकारी न हो तो अमावस्या के दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है।

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