पटना , जून 18 -- ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने गुरुवार को बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से अब तक यानी 10 वर्षों में राज्यभर के 41 लाख 56 हजार 46 लाभुकों के लिए पक्के मकान तैयार हो गए हैं। श्री कुमार ने बताया कि इस अवधि में 49 लाख 9 हजार 806 लाभुकों के आवास स्वीकृत किए गए थे। स्वीकृत आवास की तुलना में 85 फीसदी से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं।
मंत्री ने कहा कि इन 10 वर्षों में 49 लाख 18 हजार 99 आवास बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 49 लाख 9 हजार 806 लाभुकों के आवास स्वीकृत किए गए। इसमें 48 लाख 57 हजार 251 लाभुकों को प्रथम किस्त, 45 लाख 97 हजार 384 लाभुकों को दूसरी किस्त और 42 लाख 5 हजार 858 लाभुकों को तीसरी किस्त की राशि दी जा चुकी है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दूसरे चरण में वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए प्राप्त कुल लक्ष्य 12 लाख 16 हजार 961 के विरूद्ध अब तक 12 लाख 9 हजार 258 लाभुकों को आवास की स्वीकृति दे दी गई है। इसमें 11 लाख 57 हजार 637 लाभुकों को प्रथम, 9 लाख 26 हजार 909 लाभुकों को दूसरी और 5 लाख 51 हजार 157 लाभुकों को तीसरी किस्त की राशि दी जा चुकी है। इसमें 4 लाख 93 हजार 658 लाभुकों ने आवास निर्माण पूर्ण कर लिया है। यानी इतने कम समय में कुल लक्ष्य में एक-तिहाई से अधिक आवास बनकर तैयार हो गए हैं। वहीं, इसी योजना के पहले चरण में वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक आवास निर्माण के लिए निर्धारित भौतिक लक्ष्य 37 लाख 1138 के मुकाबले 37 लाख 548 लाभुकों को आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। इसमें 36 लाख 99 हजार 614 लाभुकों को पहली, 36 लाख 70 हजार 475 को दूसरी और 36 लाख 54 हजार 701 लाभुकों को तीसरी किस्त की राशि दी जा चुकी है। इसमें अब तक 36 लाख 62 हजार 388 लाभुकों ने आवास का निर्माण करा लिया है। यानी कुल लक्ष्य का 98 फीसदी से अधिक लोगों ने अपने आवास तैयार कर लिए हैं।
मंत्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में बेघर, कच्चा और जीर्ण-शीर्ण मकानों में रह रहे गरीब परिवारों को बुनियादी सुविधायुक्त पक्का मकान बनाने के लिए सहायता प्रदान के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 से इंदिरा आवास योजना को पुर्नगठित कर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) कर दिया गया था। इस योजना के तहत प्रति लाभुक को 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इससे सूबे के बेघर गरीबों को पक्का मकान का सपना सच हो रहा है।
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