नयी दिल्ली , जुलाई 07 -- अल नीनो के कारण इस साल कमजोर पड़े मानसून का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर बना हुआ है।
कृषि मंत्रालय के पांच जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार बीते साल के मुकाबले इस बार कुल बुवाई क्षेत्र में 91.95 लाख हेक्टेयर की कमी देखी गयी है और यह 20.76 प्रतिशत की गिरावट है।
मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार इस साल अब तक मात्र 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही फसलों की बुवाई हो सकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक यह आंकड़ा 442.80 लाख हेक्टेयर तक पहुँच चुका था। मौसम की बेरुखाई का सीधा प्रभाव देश की मुख्य खाद्य फसल धान पर दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष पांच जुलाई तक केवल 60.24 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही धान की बुवाई या रोपाई पूरी हो पाई है। इसके विपरीत, वर्ष 2025 में इसी समय तक 69.30 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। इस लिहाज से चालू सीजन में धान का क्षेत्र पिछले साल की तुलना में 9.06 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 13.07 कम बना हुआ है।
दलहन के मोर्चे पर भी इस बार बुवाई की रफ्तार काफी धीमी है। पिछले साल के 47.49 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार अभी तक महज 37.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की फसलें बोई गई हैं। यह पिछले वर्ष से 10.34 लाख हेक्टेयर यानी 21.77 प्रतिशत कम है।
दलहनी फसलों में अरहर सबसे पीछे है। अरहर या तूर में इस बार 12.35 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले साल के 21.00 लाख हेक्टेयर की तुलना में 8.65 लाख हेक्टेयर या करीब 41 प्रतिशत कम है।
उड़द का इस साल इसका रकबा 3.01 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 4.63 लाख हेक्टेयर से 1.62 लाख हेक्टेयर या करीब 35 प्रतिशत पीछे है।
खरीफ की तीसरी महत्वपूर्ण फसल मूंग की इस बार 16.81 लाख हेक्टेयर में बुवाई की गई है, जो पिछले साल के 17.20 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 0.39 लाख हेक्टेयर या मामूली रूप से केवल करीब दो प्रतिशत कम है। कुल्थी और मोठ दलहन पहले से मामूली बेहतर है।
दलहन से ज्यादा तिलहनी फसलें प्रभावित हुयी हैं। तिलहनी फसलों का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले रिकॉर्ड 42.96 लाख हेक्टेयर पिछड़ गया है। प्रतिशत के आधार पर यह 39 फीसदी की भारी कमी है। पिछले साल जहाँ इस समय तक 109.27 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसल लगी थी, वहीं इस साल अब तक केवल 66.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ही कवर हो पाया है।
मुख्य तिलहनी फसलों का हाल देखें तो सोयाबीन का रकबा इस बार सिमटकर 47.80 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल के 79.20 लाख हेक्टेयर से 31.40 लाख हेक्टेयर (39.64 प्रतिशत) कम है।
मूंगफली इस साल 16.93 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष के 28.00 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 11.07 लाख हेक्टेयर (39.53 प्रतिशत) की गिरावट दिखाती है।
तिल का रकबा भी बीते साल की तुलना में कमजोर है जबकि सूरजमुखी, नाइजरसीड (रामतिल),अरंडी और अन्य तिलहनपी फसलों का रकबा बीते साल की तुलना में कुछ बेहतर है।
ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मोटे अनाजों या श्रीअन्न की कुल बुवाई इस साल 60.12 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 71.86 लाख हेक्टेयर से 11.75 लाख हेक्टेयर (16.35 प्रतिशत) कम है।
मोटे अनाजों में सबसे अधिक मार बाजरा पर पड़ी है, जिसका रकबा पिछले साल के 30 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार सिर्फ 20.82 लाख हेक्टेयर (30.60 प्रतिशत) रह गया है।
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