चंडीगढ़ , अक्टूबर 29 -- पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने पिछली कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकारों पर राज्य के नहरी सिंचाई तंत्र की अनदेखी करने और भूजल संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने नहरी ढांचे को बहाल करने को प्राथमिकता दी, जिससे नहरी पानी के इस्तेमाल का स्तर 2022 में 21-22 प्रतिशत से बढ़कर करीब 88 प्रतिशत हो गया है।

श्री पन्नू ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विशेषज्ञ लंबे समय से पंजाब में भूजल स्तर गिरने को लेकर चेतावनी दे रहे थे, लेकिन पिछली सरकारों ने नहरों, रजवाहों और वितरिकाओं की उचित देखभाल नहीं की। इससे किसानों की भूजल पर निर्भरता बढ़ी और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा का संकट गहरा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के पानी की रक्षा करने का दावा करने वाली पिछली सरकारों ने राज्य के हितों की अनदेखी की।

सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का जिक्र करते हुए श्री पन्नू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा नहर की आधारशिला रखे जाने के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें सोने का फावड़ा और चांदी की बाल्टी भेंट की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अकाली दल की पिछली सरकार के दौरान एसवाईएल नहर को मंजूरी मिली थी।

श्री पन्नू ने बादल परिवार के निजी फार्महाउसों तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों की ऊंचाई बढ़ाने का भी आरोप लगाया और कहा कि राज्य की व्यापक जल सुरक्षा के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने दावा किया कि मान सरकार ने सत्ता में आने के बाद नहरी जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए। उनके अनुसार, मिट्टी में दब चुकी वितरिकाओं की पहचान की गई और खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए करीब 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई। इससे भूजल पर निर्भरता कम करने और जलस्तर में सुधार लाने में मदद मिली है।

उन्होंने पंजाब विधानसभा के हालिया सत्र का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि राज्य के जल अधिकारों से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने सदन से बहिर्गमन किया। उन्होंने भाजपा पर भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि पंजाब के हितों की बात करने वाले सभी राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

आप नेता ने केंद्र सरकार से 1994 के समझौते की समीक्षा कर यमुना के पानी में पंजाब का जायज हिस्सा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर विवाद का समाधान जल न्यायाधिकरण या उच्चतम न्यायालय के माध्यम से किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी मांग की कि पंजाब की सीमा में स्थित रूपनगर, हरिके और फिरोजपुर हेडवर्क्स के प्रबंधन एवं रखरखाव पर राज्य सरकार का पूरा नियंत्रण होना चाहिए।

श्री पन्नू ने कहा कि पानी पंजाब की कृषि, अर्थव्यवस्था और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है और राज्य के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

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