सुलतानपुर , जुलाई 16 -- उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि प्रदेश में पिछड़े वर्ग को स्थानीय निकायों में 20 प्रतिशत से अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल रहा है। आयोग विभिन्न जिलों का दौरा कर यह जांच कर रहा है कि पिछड़े वर्ग को निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण के अनुरूप उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल रहा है या नहीं।
न्यायमूर्ति सिंह ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में आयोजित बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अब तक उपलब्ध अभिलेखों और विभिन्न स्तरों पर प्राप्त जानकारी के आधार पर पिछड़े वर्ग को 20 प्रतिशत से अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल रहा है और इस संबंध में कोई विशेष समस्या सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग की जनसंख्या अधिक होने के कारण जनसंख्या के अनुपात में उन्हें और अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय राज्य सरकार को ही लेना है। सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर आयोग अध्यक्ष ने कहा कि पिछड़े वर्ग के सामने सबसे बड़ी समस्या शिक्षा का अभाव है। आर्थिक तंगी के कारण अनेक परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, जिससे उनका समग्र विकास प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि सुलतानपुर उनका 10वां अथवा 11वां जिला दौरा है। आयोग प्रदेश के सभी जिलों का भ्रमण कर तथ्य एवं सुझाव एकत्र करेगा। सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद अंतिम रिपोर्ट शासन तथा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। हालांकि उन्होंने सरकार को दिए जाने वाले संभावित सुझावों का खुलासा करने से इनकार किया।
बैठक में स्थानीय ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्ग की भागीदारी, उनके अधिकारों तथा प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तृत समीक्षा की गई। इस अवसर पर आयोग के सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एस.पी. सिंह सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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