लखनऊ , मई 23 -- भीषण गर्मी के बीच बढ़ते बिजली संकट को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली और नई व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिषद का दावा है कि प्रदेश में वर्तमान अधिकतम बिजली मांग 30,475 मेगावाट होने के बावजूद हालात इसलिए बिगड़े हैं क्योंकि प्रबंधन स्तर पर गंभीर खामियां पैदा हो गई हैं। उपभोक्ता परिषद ने अपने अध्ययन के आधार पर कहा कि प्रदेश में इससे अधिक बिजली मांग पूर्व वर्षों में भी सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। परिषद के अनुसार वर्ष 2025-26 में 31,486 मेगावाट, वर्ष 2024-25 में 30,618 मेगावाट, वर्ष 2023-24 में 28,284 मेगावाट तथा वर्ष 2022-23 में 26,589 मेगावाट की अधिकतम मांग पूरी की गई थी। इसके बावजूद उस समय वर्तमान जैसी व्यापक अव्यवस्था और बिजली संकट नहीं देखने को मिला था।
परिषद ने कहा कि उसने पहले ही विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई के दौरान लिखित रूप से आशंका जताई थी कि गर्मी के मौसम में विद्युत व्यवस्था पटरी से उतर सकती है। इस संबंध में बिजली कंपनियों से आयोग द्वारा पूछताछ भी की गई थी।उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था संकट का प्रमुख कारण बन रही है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सब-स्टेशन पर केवल तीन गैंगों को 24 घंटे की ड्यूटी पर लगाया गया है, यानी प्रत्येक आठ घंटे की शिफ्ट में केवल एक गैंग कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सब-स्टेशन पर तीन से लेकर सात-आठ तक फीडर संचालित होते हैं। भीषण गर्मी में यदि एक साथ कई फीडरों में ब्रेकडाउन हो जाए तो एक अकेली गैंग सभी स्थानों पर एक साथ पहुंचकर मरम्मत कार्य नहीं कर सकती। इसके कारण बिजली उपलब्ध होने के बावजूद उपभोक्ताओं तक कई-कई घंटे आपूर्ति नहीं पहुंच पा रही है।
परिषद ने आरोप लगाया कि गैंगों की संख्या कम किए जाने और बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों की छंटनी से मौजूदा कर्मचारी अत्यधिक दबाव में काम कर रहे हैं। जल्दबाजी में कार्य करने के कारण दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है और कई संविदा कर्मियों की जान तक चली गई है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि पहले पावर कॉरपोरेशन के पास अतिरिक्त और इमरजेंसी गैंगों की व्यवस्था रहती थी, जिससे ब्रेकडाउन की स्थिति में त्वरित राहत मिल जाती थी। वर्तमान व्यवस्था में इन व्यवस्थाओं को समाप्त कर दिए जाने से पूरी प्रणाली प्रभावित हुई है।
इसके अलावा परिषद ने "वर्टिकल व्यवस्था" पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले उपभोक्ता सीधे अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता अथवा मुख्य अभियंता से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते थे, लेकिन अब उन्हें केवल 1912 हेल्पलाइन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे उपभोक्ताओं को त्वरित समाधान नहीं मिल पा रहा है।
उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि अतिरिक्त गैंगों की व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए, संविदा कर्मियों की छंटनी रोकी जाए तथा उपभोक्ताओं को पूर्व की तरह अधिकारियों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराई जाए, ताकि बिजली व्यवस्था में सुधार हो सके।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित