चंडीगढ़ , सितंबर 15 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई ने पटियाला में तैनात पावरकॉम के कनिष्ठ अभियंता दविंदर मेहरा के निलंबन की निंदा करते हुए पंजाब सरकार से निलंबन आदेश तत्काल वापस लेने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

भाजपा पंजाब के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने मंगलवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट पर कथित टिप्पणी करने के मामले में दविंदर मेहरा को सीधे निलंबित कर दिया गया, जबकि कर्मचारियों का दावा है कि संबंधित टिप्पणी मेहरा ने नहीं की थी और वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार की गयी थी।

श्री सरीन ने कहा कि सरकार ने न तो संबंधित कर्मचारी का पक्ष सुना और न ही उसकी अपील पर विचार किया, बल्कि सीधे निलंबन आदेश जारी कर दिया। उन्होंने इसे सरकार का कथित 'तानाशाही रवैया' करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले मामले के सभी तथ्यों और संबंधित कर्मचारी का पक्ष जानना जरूरी है। यदि कर्मचारी से कोई गलती हुई भी हो तो नियमों और कानून के अनुसार जांच के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए। तथ्यों की पूरी जांच किए बिना कार्रवाई से कर्मचारियों में अविश्वास की भावना पैदा होती है।

भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट पर टिप्पणी करना अपने आप में अपराध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारी और उनके समर्थक अपनी मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं तथा मुख्यमंत्री को अनफॉलो भी कर रहे हैं। उनके अनुसार, संभवतः इससे सरकार विचलित हुई और उसने बिना ठोस आधार के कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की।

श्री सरीन ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने भाजपा की ओर से दविंदर मेहरा के निलंबन की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से आदेश वापस लेने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

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