दरभंगा , सितंबर 22 -- िला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा के तत्वावधान में पारा विधिक स्वयंसेवकों के संवेदीकरण एवं कानूनी सशक्तिकरण के लिए मंगलवार को न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने नवनियुक्त पारा विधिक स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विधिक सेवा का वास्तविक उद्देश्य समाज के उन लोगों तक न्याय और कानून की जानकारी पहुंचाना है, जो आर्थिक, सामाजिक या अन्य कारणों से न्याय व्यवस्था तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। उन्होंने कहा कि पारा विधिक स्वयंसेवक न्यायिक व्यवस्था और आम लोगों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। इसलिए उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता, सजगता और तत्परता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना एक पुनीत कार्य है और उम्मीद है कि सभी स्वयंसेवक इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।
प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने पारा विधिक स्वयंसेवकों के कार्य, विधिक सेवा प्राधिकरणों की भूमिका, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत निःशुल्क विधिक सेवा पाने के हकदार व्यक्तियों, नालसा की विभिन्न योजनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त जिला जज सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने लोक अदालत की कार्यप्रणाली से स्वयंसेवकों को अवगत कराया।
बिहार सेवा समिति, मधुबनी के रिसोर्स पर्सन अधिवक्ता संभव गुप्ता एवं ताराकांत ऋषि ने मानव तस्करी की रोकथाम तथा हनीफुर रहमान वाद के निर्णय पर चर्चा की। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम एवं अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
उद्घाटन सत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जुनैद आलम भी मौजूद थे। संचालन न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद सौरव ने किया। इस अवसर पर बिहार सेवा समिति के संजीव कुमार, तारानंद ठाकुर, नरेंद्र कुमार कर्ण सहित सभी पारा विधिक स्वयंसेवक उपस्थित थे।
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