रांची , सितंबर 21 -- झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने पारसनाथ पर्वत पर जैन एवं आदिवासी समाज के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक अधिकारों को लेकर उत्पन्न विवाद के स्थायी एवं सम्मानजनक समाधान की मांग की है।
इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के स्तर पर उच्चस्तरीय संवाद एवं समन्वय समिति गठित करने का आग्रह किया है।
पत्र में कहा गया है कि झारखंड स्थित पारसनाथ पर्वत जैन समाज का अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है। जैन धर्म के अनेक तीर्थंकरों से जुड़े होने के कारण देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की इस स्थल के प्रति गहरी धार्मिक आस्था है। वहीं, पारसनाथ क्षेत्र स्थानीय आदिवासी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में दोनों समुदायों के बीच उत्पन्न मतभेद संवेदनशील विषय है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि विवाद का समाधान किसी एक पक्ष की भावनाओं या अधिकारों की अनदेखी कर नहीं, बल्कि आपसी संवाद, संवैधानिक व्यवस्था और सभी पक्षों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्थाओं के सम्मान के साथ किया जाना चाहिए।
श्री अग्रवाल ने गृह मंत्री से आग्रह किया कि समिति में जैन समाज, आदिवासी समाज, झारखंड सरकार, स्थानीय प्रशासन और विषय के विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। समिति पारसनाथ पर्वत की जैन तीर्थस्थल के रूप में पवित्रता को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय आदिवासी समाज की पारंपरिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक भावनाओं और वैधानिक अधिकारों पर भी विचार करे।
पत्र में पारसनाथ पर्वत और आसपास के क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय स्वरूप को सुरक्षित रखने, दोनों समुदायों के बीच नियमित संवाद की स्थायी व्यवस्था बनाने तथा पर्यटन और विकास गतिविधियों के लिए ऐसी नीति तैयार करने की मांग की गई है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका और पर्यावरण की रक्षा हो सके।
श्री अग्रवाल ने कहा कि सभी पक्षों की सहमति से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए, ताकि पारसनाथ की गरिमा, धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द कायम रहे। उन्होंने गृह मंत्री से इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र पहल कर स्थायी, न्यायसंगत और सर्वमान्य समाधान की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया।
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