सहारनपुर , जुलाई 7 -- उत्तर प्रदेश का विश्व प्रसिद्ध सहारनपुर लकड़ी नक्काशी उद्योग पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक के समन्वय से वैश्विक बाजार में अपनी नई पहचान बना रहा है। करीब 600 करोड़ रुपये के निर्यात वाले इस हस्तशिल्प उद्योग को नई तकनीकों के इस्तेमाल और कुशल कारीगरों की बदौलत नई गति मिल रही है।

एक जुलाई को सहारनपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां के कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग की सराहना करते हुए कहा था कि सहारनपुर से 600 करोड़ रुपये का निर्यात प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कारीगरों का सम्मान करती है और इस उद्योग को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले काष्ठकला के वरिष्ठ कारीगर मोहम्मद असलम सैफी ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने और अन्य व्यापारिक बाधाओं के कारण उद्योग को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद आधुनिक तकनीक अपनाने से उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने बताया कि बड़े उद्योग समूहों की रुचि बढ़ने के साथ अब लकड़ी के उत्पादों के निर्माण में लेजर और सीएनसी (कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल) मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इन तकनीकों से कम समय में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है, लागत घट रही है और उत्पादों की गुणवत्ता तथा एकरूपता भी बेहतर हो रही है।

श्री सैफी के अनुसार वह फ्रांस, अमेरिका और यूरोप सहित विभिन्न देशों के खरीदारों की मांग के अनुरूप डिजाइन तैयार करते हैं। सहारनपुर से फर्नीचर, सजावटी लाइट लैंप, होटलों में इस्तेमाल होने वाला फर्नीचर, आभूषण बॉक्स, साइन बोर्ड, जालीदार लकड़ी के परदे, टेबल, कुर्सियां तथा अन्य कलात्मक उत्पादों का निर्यात किया जाता है।

उन्होंने बताया कि लेजर मशीन से लकड़ी पर अत्यंत महीन और एक समान नक्काशी की जाती है, जबकि सीएनसी मशीन से सटीक कटिंग संभव होती है। इससे उत्पाद जल्दी तैयार होते हैं, लागत कम आती है और नक्काशी खराब होने की आशंका भी घट जाती है।

असलम सैफी का मानना है कि यदि पारंपरिक हस्तकौशल के साथ आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग जारी रहा तो सहारनपुर का लकड़ी नक्काशी उद्योग विश्व बाजार में चीन समेत अन्य प्रतिस्पर्धी देशों को कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखता है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में सहारनपुर के जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने उनसे मुलाकात कर उनकी कारीगरी की सराहना की तथा उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को देखने की इच्छा भी व्यक्त की।

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