नयी दिल्ली , सितंबर 16 -- पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर तीसरे बिम्सटेक सम्मेलन का बुधवार को गोवा में शुभारंभ हुआ।

दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन आयुष मंत्रालय कर रहा है, जबकि अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), गोवा इसका नोडल संस्थान है। सम्मेलन के साथ पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधन एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों पर बिम्सटेक नोडल समूह की दूसरी बैठक भी आयोजित की जा रही है।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव एवं उद्घाटन सत्र की अध्यक्ष मोनालिसा दास ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने में बिम्सटेक टास्क फोर्स फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (बीटीएफटीएम) की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्यबल अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण, मानकीकरण, औषध संहिताओं के विकास, नियामक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को गति दे सकता है। उन्होंने अप्रैल 2025 में बैंकॉक में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित प्रस्तावित बिम्सटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ट्रेडिशनल मेडिसिन का भी उल्लेख किया।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. वैद्य पी.के. प्रजापति ने कहा कि बिम्सटेक क्षेत्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, जैविक संसाधनों और सामुदायिक ज्ञान की समृद्ध विरासत का केंद्र है। सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के साथ वैध अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने वाला सहयोगी ढांचा विकसित करना है। इसमें पूर्व सूचित सहमति, पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों और न्यायसंगत लाभ-साझेदारी के माध्यम से समुदायों के हितों की रक्षा पर जोर दिया जा रहा है।

बिम्सटेक के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा स्वास्थ्य एवं मानव संसाधन विकास प्रभाग के निदेशक कदिरकामु कंदासामी योगनादन ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग का उद्देश्य लोगों के कल्याण में सुधार, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना और पारंपरिक चिकित्सा की विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।

सम्मेलन में बंगलादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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