बैतूल , मार्च 20 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम दानवाखेड़ा एक बार फिर दूषित पानी की मार झेल रहा है।

झिरिया (स्थानीय जलस्रोत) के गंदे पानी के उपयोग से गांव में खुजली सहित त्वचा रोग तेजी से फैल गया है। हालात ऐसे हैं कि 25 से अधिक बच्चे और ग्रामीण इसकी चपेट में आ चुके हैं, जबकि 6 मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में भर्ती कराया गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आया कि गांव में पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। एक भी हैंडपंप नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में झिरिया के दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। यही पानी पीने और घरेलू कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलता जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई महीनों से वे इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नवंबर 2025 में भी इसी तरह की बीमारी फैलने से दो बच्चों की मौत हो चुकी है और 50 से अधिक लोग बीमार पड़े थे। इसके बाद भी जिम्मेदार विभागों ने स्थायी व्यवस्था नहीं की। पीएचई विभाग द्वारा 3 दिसंबर 2025 को चार दिनों के भीतर हैंडपंप लगाने का दावा किया गया था, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी वह वादा अधूरा है।

गांव के शीलू और मंगल आदिवासी का परिवार इस लापरवाही की बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है। उनकी पत्नी कस्तूरी और चारों बच्चे गंभीर रूप से खुजली और त्वचा संक्रमण से पीड़ित हैं। बच्चों के शरीर पर फोड़े-फुंसियां निकल आई हैं। सभी का इलाज घोड़ाडोंगरी अस्पताल में जारी है। कस्तूरी ने बताया कि वे रोजमर्रा के उपयोग के लिए झिरिया का पानी ही इस्तेमाल करते हैं, जिसके चलते पूरा परिवार बीमार हो गया।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर हालात संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। बीएमओ डॉ. संजीव शर्मा के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम ने 28 मरीजों की जांच कर उपचार शुरू किया है। इनमें 19 मरीज स्केबीज (खुजली) और 9 अन्य बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं। एहतियात के तौर पर 6 बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया है, जिनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

टीम द्वारा गांव में पानी का क्लोरीनेशन कराया जा रहा है और लोगों को स्वच्छता व बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बीमारी का खतरा बना रहेगा।

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