लाहौर , सितंबर 22 -- पाकिस्तान पुलिस ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की दो और बहनों को हिरासत में ले लिया है।

यह कार्रवाई उनकी बहन अलीमा खान को रविवार को लाहौर स्थित उनके आवास से लोक व्यवस्था बनाये रखने संबंधी कानून (एमपीओ) के तहत गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटे बाद हुई।

इमरान खान के परिवार और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने सोमवार तड़के पुष्टि की कि उज्मा खान और नूरीन नियाज़ी को भी परिवार के कई अन्य सदस्यों के साथ हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई रविवार को अलीमा खान की गिरफ्तारी को लेकर आयोजित संवाददाता सम्मेलन के कुछ घंटे बाद हुई।

पीटीआई के प्रवक्ता शेख वकास अकरम ने सोशल मीडिया पर कहा, "पंजाब पुलिस ने इमरान खान की दोनों बहनों को उनके बच्चों और अलीमा खान के बेटों के साथ गिरफ्तार कर लिया है।" उन्होंने कहा कि उन्हें बख्तरबंद वाहन में किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है।

इमरान खान के बेटे कासिम ने हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए कहा कि अधिकारियों ने उनके रिश्तेदारों के घरों में जबरन प्रवेश किया और बिना कोई स्पष्टीकरण या गिरफ्तारी का कारण बताए उन्हें वाहनों में बैठा लिया। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा, "यह आपराधिक व्यवहार है। इसे माफ नहीं किया जा सकता।"ये गिरफ्तारियां 27 सितंबर को प्रस्तावित पीटीआई के विरोध मार्च से करीब एक सप्ताह पहले हुई हैं। पीटीआई यह मार्च इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर निकालने की तैयारी कर रही है।

सुश्री अलीमा खान को रविवार को लाहौर के उपायुक्त की ओर से एमपीओ के तहत 30 दिन की निवारक हिरासत का आदेश जारी किए जाने के बाद हिरासत में लिया गया था। यह कानून अधिकारियों को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने की अनुमति देता है। उनकी दोनों बहनों को भी इसी कानून के तहत हिरासत में लिया गया है।

अलीमा खान के वकील राणा मुदस्सर उमर ने कहा कि इन हिरासतों को लाहौर उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है। इस बीच, गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पीटीआई को प्रस्तावित मार्च आगे नहीं बढ़ाने की चेतावनी दी।

श्री नकवी ने कहा, "वे इस तरह के नाटक से कुछ हासिल नहीं कर सकते। मैं आज फिर कहूंगा कि अभी भी समय है। ऐसी स्थिति में न जायें, जहां से वापस लौटने का कोई रास्ता न हो।" उन्होंने पिछले सप्ताह के एक अदालत के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि राजनीतिक दलों को सार्वजनिक सड़कों पर कब्जा करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पीटीआई से अपना रुख बदलने की अपील की।

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