इस्लामाबाद , मई 26 -- पाकिस्तान ने 'अब्राहम समझौते' पर हस्ताक्षर करने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है।
पाकिस्तान का यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ चल रही वार्ताओं से जुड़ी व्यापक क्षेत्रीय व्यवस्था के हिस्से के रूप में पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम-बहुल देशों से इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने के आग्रह के बाद आया है।
'समा टीवी' को दिये साक्षात्कार में श्री आसिफ ने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल होना चाहिए, जो हमारी मौलिक विचारधाराओं से टकराता हो।" उन्होंने जोर दिया कि पाकिस्तान ऐसे किसी भी समझौते का समर्थन नहीं करेगा, जो उसे फिलीस्तीन-इजरायल पर देश के लंबे समय से चले आ रहे सिद्धांतों के खिलाफ खड़ा करता हो।
इजरायल के साथ किसी भी जुड़ाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा, "आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?" पाकिस्तान के आधिकारिक रुख की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा, "हमारा रुख बेहद साफ है कि यह हमें स्वीकार्य नहीं है।"श्री आसिफ ने इस रुख के प्रतीक के रूप में पाकिस्तान की पासपोर्ट नीति की ओर भी इशारा किया और कहा कि पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पासपोर्ट इजरायल को मान्यता नहीं देते हैं। उन्होंने कहा, "हम अकेले ऐसे देश हैं, जिसके पासपोर्ट पर इजरायल का नाम तक शामिल नहीं है।"पाकिस्तान ने 1947 में अपनी स्थापना के बाद से कभी इजरायल को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है और आज तक लगातार यही रुख बनाये रखा है कि इजरायल के साथ कोई भी राजनयिक संबंध केवल 1967 से पहले की सीमाओं पर आधारित एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के बाद ही संभव है।
श्री ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में सऊदी अरब और कतर सहित खाड़ी देशों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय देशों से ईरान के साथ किसी भी भावी समझौते के साथ-साथ इस 'अब्राहम समझौते' में शामिल होने का आह्वान किया था। वर्ष 2020 में श्री ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए इन समझौतों के तहत इजरायल ने यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान सहित कई अरब देशों के साथ अपने संबंधों को सामान्य किया था। इससे अरब जगत के साथ इजरायल के संबंधों का काफी विस्तार हुआ। इसमें इस संधि से पहले केवल मिस्र और जॉर्डन ही शामिल थे।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पहले भी उन सुझावों और अटकलों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि व्यापक क्षेत्रीय पहलों में उसकी भागीदारी इजरायल के प्रति नीति में किसी बदलाव का संकेत है।
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