अमृतसर , जून 15 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से सम्बंधित एक विवादित वीडियो के मामले में श्री अकाल तख्त साहिब में सोमवार को पांच सिंह साहिबानों ने सिख संगत की भावनाओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान को औपचारिक रूप से 'गुरु-द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया। साथ ही गुरु खालसा पंथ से अपील की गयी कि वे उनके साथ किसी प्रकार का संबंध न रखें।

बैठक में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किये गये। इनमें पंजाब सरकार द्वारा पारित 'द जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' तथा मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवादित वीडियो मामले पर विचार-विमर्श किया गया। पहले प्रस्ताव में कहा गया कि पंजाब सरकारने केंद्रीय सिख संस्थाओं से परामर्श किये बिना सत्कार संशोधन कानून पारित किया। बैठक में उल्लेख किया गया कि पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को आठ मई को श्री अकाल तख्त साहिब में बुलाकर कानून में सिख भावनाओं के अनुरूप संशोधन के लिए 15 दिन का समय दिया गया था। इसके अलावा 11 मई को लिखित आपत्तियां भी सरकार तक पहुंचाई गयी थीं।

प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार ने इन आपत्तियों की अनदेखी की और अकाल तख्त साहिब की भावनाओं को नजरअंदाज किया। साथ ही कहा गया कि मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयानों से सिख समुदाय में रोष और विभाजन की स्थिति पैदा हुई।

पांच सिंह साहिबानों ने निर्णय लिया कि इस मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान को छोड़कर पंजाब मंत्रिमंडल के सभी सिख मंत्रियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सिख विधायकों को 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में तलब किया जाएगा। गैर-सिख मंत्रियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।दूसरे प्रस्ताव में मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चार जनवरी 2026 को प्राप्त शिकायत से जुड़े एक विवादित वीडियो पर चर्चा की गयी। प्रस्ताव के अनुसार, 15 जनवरी को अकाल तख्त साहिब में पेश होने पर मुख्यमंत्री ने वीडियो को कथित तौर पर फर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से निर्मित बताया था।

बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री को वीडियो की जांच के लिए दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के नाम सुझाने को कहा गया था और 27 जनवरी को इस संबंध में पत्र भी भेजा गया, लेकिन मुख्यमंत्री या उनके कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

प्रस्ताव के अनुसार, बाद में अकाल तख्त साहिब ने केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं से वीडियो की जांच करवाई। 27 मई और 13 जून 2026 की रिपोर्टों में कथित तौर पर वीडियो को वास्तविक बताया गया तथा उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ या एआई जनित हेरफेर के प्रमाण नहीं पाये गये।

प्रस्ताव में दावा किया गया कि वीडियो में मुख्यमंत्री भगवंत मान सिखों के दसों गुरु साहिबानों की प्रतीकात्मक तस्वीर तथा 20वीं सदी के प्रमुख सिख व्यक्तित्व ज्ञानी जरनैल सिंह खालसा भिंडरांवाले की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते दिखाई देते हैं।

इस मुद्दे पर आयोजित व्यापक बैठक में पंथक जत्थेबंदियों, संप्रदायों, दल पंथों, विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। बैठक में यह मत सामने आया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया जाना चाहिए।

पांच सिंह साहिबानों ने सिख संगत की भावनाओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान को औपचारिक रूप से 'गुरु-द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया। साथ ही गुरु खालसा पंथ से अपील की गई कि वे उनके साथ किसी प्रकार का संबंध न रखें।

बैठक में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री का पद अत्यंत सम्मानजनक होता है और उससे राज्य के सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने की अपेक्षा की जाती है। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि वीडियो मामले में मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त साहिब के समक्ष गलत जानकारी दी, जिससे उनके आचरण और निर्णय क्षमता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।

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