बैतूल , जुलाई 24 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पांच राष्ट्रीय पक्षी मोरों की मौत के मामले में वन विभाग ने एक किसान को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में आशंका व्यक्त की गई है कि फसल को पक्षियों से बचाने के लिए खेत में बिखेरे गए संदिग्ध मक्का के दाने खाने से मोरों की मौत हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि दानों में अलग से विषैला पदार्थ मिलाया गया था या वे उपचारित (ट्रीटेड) बीज थे। इसका खुलासा जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही होगा।

वन विभाग के अनुसार घटना 17 जुलाई को शाहपुर वन परिक्षेत्र के डूडर-काजली बीट से लगे एक खेत में हुई थी। सूचना मिलने पर वन अमला मौके पर पहुंचा और पांच मृत मोरों के शव बरामद किए। घटनास्थल से संदिग्ध मक्का के दाने भी जब्त कर परीक्षण के लिए भेजे गए तथा पंचनामा कार्रवाई के बाद जांच शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि संबंधित खेत मेंढा खेड़ा निवासी रतन आदिवासी का है, जिसे कांजी तालाब निवासी कमलेश आदिवासी ने ठेके पर लिया था। वन विभाग का दावा है कि पूछताछ में फसल को पक्षियों से बचाने के उद्देश्य से खेत में संदिग्ध मक्का के दाने बिखेरने की बात सामने आई है। विभाग का मानना है कि इन्हीं दानों को खाने से मोरों की मौत हुई।

आरोपी कमलेश आदिवासी ने पूछताछ में यह कहते हुए अपनी संलिप्तता से इनकार किया कि उसे यह जानकारी नहीं है कि मक्का के दानों में किसी ने विषैला पदार्थ मिलाया था। इसके बावजूद वन विभाग ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और प्रारंभिक जांच के आधार पर उसे गिरफ्तार कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस बीच स्थानीय किसानों का कहना है कि मक्का की बुवाई में उपयोग होने वाले अधिकांश बीज पहले से ही रासायनिक रूप से उपचारित होते हैं। उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि खेत में मिले दाने उपचारित बीज थे या उनमें अलग से कोई विषैला पदार्थ मिलाया गया था।

उत्तर वन मंडल के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) नवीन गर्ग ने बताया कि मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है और नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मक्का के दानों में अलग से जहर मिलाया गया था या नहीं। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जारी है और किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने पर उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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