भोपाल , जून 10 -- मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय की स्थापना के तेरहवें वर्षगांठ समारोह के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय महुआ महोत्सव का आज यहां श्यामला हिल्स स्थित जनजातीय संग्रहालय में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समापन हो गया। महोत्सव में मध्यप्रदेश सहित 13 राज्यों के पारंपरिक एवं जनजातीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन प्रदर्शित किए गए।

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव का आयोजन जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में और दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर के सहयोग से किया गया। समापन अवसर पर अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे ने कलाकारों का स्वागत किया।

महोत्सव में बच्चों के लिए कठपुतली प्रदर्शन और प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने कठपुतली निर्माण की बारीकियों की जानकारी दी। साथ ही पारंपरिक शिल्प प्रदर्शनी में बांस, धातु, कपड़ा, खराद, मिट्टी और अन्य शिल्पों का प्रदर्शन किया गया। देशज व्यंजन अनुभाग में मध्यप्रदेश, उड़ीसा, त्रिपुरा और असम के पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में प्रयागराज की वंदना मिश्रा एवं साथियों ने अवधी लोकगीत और भजनों की प्रस्तुति दी। इसके बाद सिक्किम के कलाकारों ने सिंग्गीछाम नृत्य, राजस्थान के कलाकारों ने गैर नृत्य तथा उत्तरप्रदेश के कलाकारों ने सैला नृत्य प्रस्तुत किया।

मिजोरम के कलाकारों ने चैराव बैम्बू नृत्य, उड़ीसा के दल ने रणपा नृत्य तथा उत्तरप्रदेश के कलाकारों ने झूमर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले के कलाकारों ने गुदुमबाजा नृत्य की प्रस्तुति दी।

तेलंगाना के कलाकारों ने माथुरी नृत्य, कर्नाटक के दल ने कमसाले नृत्य तथा आंध्रप्रदेश के कलाकारों ने तपेटगुल्लू नृत्य प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न राज्यों की लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं का परिचय कराया गया। महोत्सव में बड़ी संख्या में कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने भाग लेकर देश की विविध लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का आनंद लिया।

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