चंडीगढ़ , मार्च 18 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने मात्र चार वर्षों में मौसमी नदियों से 10,000 क्यूसेक पानी अनलॉक करके और दम तोड़ते नहर नेटवर्क को पुनर्जीवित कर खेतों तक भाखड़ा नहर के बराबर पानी पहुँचाना सुनिश्चित किया है।
श्री मान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में पिछले चार वर्षों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नहरी सिंचाई का दायरा 2022 के 26.50 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत हो गया है।अप्रैल 2022 से अब तक नहरों की लाइनिंग, मरम्मत और आधुनिकीकरण पर 6,700 करोड़ रूपये खर्च किए गए हैं, जो पंजाब के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक है। पंजाब की कुल 75.90 लाख एकड़ सिंचाई क्षमता में से मार्च 2022 तक केवल 20.89 लाख एकड़ को पानी मिल रहा था। आज यह बढ़कर 58 लाख एकड़ हो गया है। लगभग 2,000 करोड़ रूपये खर्च करके 13,000 किमी लंबी नहरों का निर्माण और बहाली की गई। कुल 15,539 नहरों की सफाई और 18,349 खालों को पुनर्जीवित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 545 किमी लंबी 101 छोड़ी गई नहरों को फिर से शुरू किया गया है। तरनतारन की 22 किमी लंबी सरहाली माइनर, जो मिट्टी में दबकर गायब हो चुकी थी, उसे खोजकर चालू किया गया। उन्होंने बताया कि 1952 में बनी फिरोजपुर फीडर नहर और सरहिंद नहर को रिकॉर्ड समय में अपग्रेड किया गया, जिससे उनकी क्षमता में क्रमशः 2,682 और 2,844 क्यूसेक की वृद्धि हुई। अंत: अब किसानों को सिंचाई के लिए अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ता। फिरोजपुर-सरहिंद फीडर में 24 घंटे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। 25 वर्षों से लंबित शाहपुर कंडी डैम परियोजना को Rs.3,394.49 करोड़ की लागत से पूरा किया गया है, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी रुकेगा। नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से भूजल पर निर्भरता कम हुई है। गुरदासपुर के एक गांव में भूजल निष्कर्षण 61.48 प्रतिशत से घटकर 31 प्रतिशत रह गया है।
श्री मान ने कहा कि विभाग ने रेस्ट हाउस और हेडवर्क्स सहित 26 पर्यटन स्थलों को विकसित किया है, जहाँ बोटिंग जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। सतलुज, रावी और घग्गर जैसी नदियों से सिल्ट निकालने और तटबंधों को मजबूत करने के लिए Rs.477 करोड़ का उपयोग किया गया है।
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