नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) और उसके निदेशक प्रतीक जैन पर की गई छापेमारी पर उच्चतम न्यायालय में एक कैविएट दायर की है।
इस कैविएट में राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि उसकी बात सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। कानून के अंतर्गत कैविएट इसलिए दायर की जाती है ताकि न्यायालय किसी पक्ष की बात सुने बिना उसके विरुद्ध कोई प्रतिकूल या एकतरफा आदेश पारित न करे।
यह कदम कोलकाता में आई-पीएसी और उसके निदेशक प्रतीक जैन से जुड़े कई परिसरों पर ईडी द्वारा आठ जनवरी को की गई तलाशी के बाद उत्पन्न हुए विवाद के बीच उठाया गया है।
यह तलाशी कथित रूप से करोड़ों रुपये के कोयला चोरी से जुड़े धन शोधन मामले में पीएमएलए के अंतर्गत की गई। ईडी ने दिल्ली और पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की तलाशी ली।
ईडी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर तलाशी के दौरान छापेमारी स्थलों में से एक में दाखिल हुईं और दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित महत्वपूर्ण सबूतों को अपने साथ ले गयी थीं। इन सबूतों के बारे में एजेंसी का दावा है कि इन्हें उसके कब्जे से ले लिया गया था। ईडी ने आरोप लगाया है कि यह जांच में हस्तक्षेप के समान है।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने इन आरोपों का खंडन किया है और केंद्रीय एजेंसी पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर राजनीतिक उद्देश्यों से काम करने का आरोप लगाया है। नौ जनवरी को, ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से तलाशी अभियान में कथित बाधा की जांच कराने की मांग की।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस अधिकारियों की मदद से प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी में बाधा डाली और आपत्तिजनक सामग्री को हटा दिया। कलकत्ता उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में ईडी ने दावा किया कि कोयला चोरी से जुड़े हवाला फंड के लगभग 20 करोड़ रुपये आई-पीएसी को भेजे गए थे।
एजेंसी ने कहा कि आई-पीएसी 2021 से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और पश्चिम बंगाल सरकार के लिए राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर रही है। याचिका में दावा किया गया है कि जांच के दौरान मिले ठोस सबूतों से पता चलता है कि अपराध की धनराशि हवाला चैनलों के माध्यम से आई-पीएसी को हस्तांतरित की गई थी।
ईडी ने आगे आरोप लगाया कि हस्तक्षेप न करने का अनुरोध किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री तलाशी के दौरान लाउडन रोड स्थित प्रतीक जैन के आवास और बाद में साल्ट लेक स्थित आई-पीएसी कार्यालय में दाखिल हुई।
एजेंसी ने दावा किया कि पुलिस कर्मियों की सहायता से डिजिटल उपकरण एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरदस्ती ले लिए गए और मुख्यमंत्री बनर्जी आठ जनवरी को दोपहर 12:15 बजे के आसपास परिसर से चली गईं।
ईडी ने कथित रूप से वापस लिए गए डिजिटल उपकरणों एवं दस्तावेजों को तत्काल जब्त करने, सील करने एवं फोरेंसिक रूप से संरक्षित करने का निर्देश मांगा है। साथ ही, उसने डेटा तक पहुंच, उसे हटाने या उसमें छेड़छाड़ पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश की भी मांग की है।
इसके अलावा, एजेंसी ने आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान मौजूद स्थानीय पंच गवाहों को राज्य अधिकारियों द्वारा ले जाया गया और उनसे जबरन यह दर्ज करवाया गया कि तलाशी शांतिपूर्ण तरीके से हुई और कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। ईडी के अनुसार, गवाहों से तथ्यों के विपरीत बयान दिलवाए गए।
आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री बनर्जी ने ईडी पर भाजपा के राजनीतिक हथियार के रूप में काम करने और उनकी पार्टी की आंतरिक रणनीति चुराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। नौ जनवरी को उन्होंने कोलकाता में जादवपुर से हाजरा क्रॉसिंग तक 10 किलोमीटर का विरोध मार्च निकाला और दावा किया कि उन्होंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है।
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