कोलकाता , जुलाई 23 -- पश्चिम बंगाल विधानसभा में लोक लेखा समिति के लिए गुरुवार को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से कुल 20 सदस्यों के नाम प्रस्तावित किए गए हैं।
विधानसभा सूत्रों के अनुसार, समिति के कुल 20 पदों के लिए ठीक 20 नामांकन ही प्राप्त हुए हैं। ऐसे में किसी औपचारिक मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हालांकि, इन नामांकनों ने विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी आंतरिक गुटबाजी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
विपक्ष के छह प्रत्याशियों में से केवल एक नाम सुश्री ममता बनर्जी खेमे की ओर से प्रस्तावित किया गया है, जबकि बाकी पांच नाम श्री ऋतब्रत बनर्जी खेमे द्वारा समर्थित हैं। वरिष्ठ विधायक अशोक देब को ममता बनर्जी खेमे ने नामित किया है।
दूसरी ओर, श्री ऋतब्रत खेमे ने श्री फिरहाद हकीम, श्री बिप्लब मित्रा, श्री गुलाम रब्बानी, श्री कन्हैयालाल अग्रवाल और श्री समर मुखोपाध्याय के नाम आगे बढ़ाए हैं। शेष 14 उम्मीदवार सत्ता पक्ष की ओर से हैं।
सत्ता पक्ष के नामांकित सदस्यों में श्री अनूप कुमार साहा, श्री अम्लान भादुड़ी, श्री बंकिम चंद्र घोष, श्री हिरण्मय चट्टोपाध्याय, श्री कृष्णेंदु मुखोपाध्याय, श्री राजेश कुमार, सुश्री रूपा गांगुली, श्री सैकत पांजा, श्री समरेंद्र नाथ घोष, सुश्री शिखा चट्टोपाध्याय, सुश्री सोनम लामा, सौरव सिकदार, सुब्रत ठाकुर और स्वपन कुमार दास शामिल हैं।
अब सभी की नजरें समिति अध्यक्ष के पद पर टिकी हैं। संसदीय परंपराओं के अनुसार इस समिति के अध्यक्ष का पद विपक्ष को दिया जाता है।
विधानसभा सूत्रों के संकेत के अनुसार, श्री फिरहाद हकीम इस दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सत्ता संघर्ष के बीच यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। अगर श्री हकीम को अध्यक्ष चुना जाता है, तो इससे ऋतब्रत खेमे की स्थिति और मजबूत होगी और सुश्री ममता बनर्जी का खेमा समिति के शीर्ष पद से बाहर रह जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में समिति के अध्यक्ष का पद पहले भी विवादों में रहा है। पिछले तृणमूल शासन के दौरान सुश्री मुकुल रॉय, श्री मानस भूनिया और श्री सुमन कांजीलाल जैसे विपक्षी विधायकों को अध्यक्ष बनाए जाने पर विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की थी। उस समय श्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में विपक्ष ने यह आरोप लगाते हुए पीएसी की बैठकों का बहिष्कार किया था कि संसदीय परंपराओं की अनदेखी की जा रही है।
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