नयी दिल्ली , अप्रैल 25 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गेहूं घोटाले से जुड़े मामले में कोलकाता, बर्दवान और हाबरा स्थित नौ ठिकानों पर तलाशी ले रही है। यह कार्रवाई निरंजन चंद्र साहा और अन्य आरोपियों से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं तथा निर्यातकों के परिसरों पर की जा रही है।

प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत शुरू की है, जो पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा बशीरहाट थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गयी है। यह मामला घोजाडांगा भूमि सीमा शुल्क केंद्र के उप आयुक्त की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप लगाया गया था।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से लाभार्थियों के लिए निर्धारित गेहूं को अवैध रूप से आपूर्ति श्रृंखला से बाहर निकालकर कम कीमत पर प्राप्त किया और फिर उसे खुले बाजार में ऊंची कीमत पर बेच दिया। इस प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ताओं, अधिकृत वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत बतायी गयी है।

जांच में यह भी सामने आया कि गेहूं की पहचान छिपाने के लिए भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकार केचिह्न वाले मूल बोरे हटाकर या उलटकर दोबारा भरे गये, ताकि उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाई जा सके।

इसके बाद इस गेहूं को वैध माल के रूप में दिखाकर खुले बाजार में बेचा गया या निर्यात किया गया, जिससे आरोपियों को अवैध लाभ हुआ और अपराध से अर्जित आय उत्पन्न हुई।

प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में आगे की जांच जारी होने की जानकारी दी है।

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