कोलकाता , जुलाई 14 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने मिड-डे मील रसोइयों के मासिक मानदेय को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिए हैं।
राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री-पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत मंगलवार को कई बड़े सुधारों को मंजूरी दी है। इन सुधारों का उद्देश्य स्कूली शिक्षा को मजबूत करते हुए छात्रों को पोषण की बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।
सरकार के इस सुधारवादी कदम से कुल 639 करोड़ रुपये के इस पैकेज के तहत राज्यभर के लगभग 51.61 लाख पूर्व प्राथमिक और प्राथमिक स्कूल के छात्रों, करीब 2.24 लाख रसोइयों और हजारों सरकारी स्कूलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का ऐलान करते हुए इन सुधारों से छात्रों को बेहतर पोषण सुविधा मिलने, रसोइयों को अधिक मानदेय मिलने और प्रधानमंत्री-पोषण योजना के तहत सभी स्कूलों में खाना बनाने वाली गैस कनेक्शन की सुविधा सुनिश्चित होने की बात कही।
उन्होंने सोशल मीडिया पर इन उपायों को कार्यक्रम को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने लिखा, "हमने 51.61 लाख पूर्व प्राथमिक और प्राथमिक छात्रों के लिए खाना पकाने की लागत को प्रति बच्चा प्रति दिन के हिसाब से 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये करने को मंजूरी दी है। हमने प्रधानमंत्री-पोषण स्कूलों में 100 प्रतिशत एलपीजी कवरेज को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत प्रति यूनिट 3,000 रुपये की एलपीजी किस्त की लागत सरकार उठाएगी।
लगभग 414.63 करोड़ रुपये के ये उपाय हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित रसोई और अधिक पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करेंगे।"राज्य ने योजना के तहत काम कर रहे लगभग 2.24 लाख रसोइयों के मासिक मानदेय में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारे लगभग 2.24 लाख रसोइयों के अमूल्य योगदान को देखते हुए हमने उनके मासिक मानदेय को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने को भी मंजूरी दी है, जिसके लिए लगभग 224 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी।"सरकार ने स्कूल की रसोई को आधुनिक और खाना पकाने के लिए सुरक्षित और साफ-सुथरा माहौल बनाने के लिए योजना के तहत सभी स्कूलों में 100 प्रतिशत एलपीजी कवरेज देने का फैसला किया है। एलपीजी कनेक्शन का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी और इस पहल के लिए 2.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन भी दिया जाएगा।
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