नयी दिल्ली/कोलकाता , जुलाई 31 -- भूमि अधिग्रहण नहीं हो पाने की वजह से पश्चिम बंगाल में रेलवे की विभिन्न परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। राज्य के लिए मंज़ूर की गयीं 63 परियोजनाओं के लिए लगभग 73 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण अभी तक बाकी है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई के बाद से राज्य में रेलवे की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन अभी भी ज़मीन नहीं मिल पाने के कारण कई महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं का काम रुका हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में रेलवे परियोजनाओं के लिए कुल 4,696 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत है। इसमें से अब तक केवल 1,273 हेक्टेयर, यानी 27 प्रतिशत ज़मीन का ही अधिग्रहण हुआ है, जबकि बाकी 3,423 हेक्टेयर (73 प्रतिशत) ज़मीन का अधिग्रहण अभी बाकी है। मई 2026 से ज़मीन अधिग्रहण की गति तेज़ हुई है और कई लंबे समय से लंबित परियोजनाओं में प्रगति हुई है।

रेलवे के अनुसार 33 किलोमीटर लंबी कालियागंज-बुनियादपुर नई लाइन के लिए, जिसके लिए 168 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत है, उत्तर दिनाजपुर में 46 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण निर्णय नौ जुलाई को लिया गया, जबकि दक्षिण दिनाजपुर में बाकी 122 हेक्टेयर ज़मीन के अधिग्रहण के लिए शुरुआती अधिसूचना जारी की गयी है।

इसी तरह से नहाटी-रानाघाट तीसरी लाइन परियोजना के लिए राज्य सरकार के साथ मालिकाना हक का विवाद सुलझा लिया गया है। इस परियोजना के लिए , 13 हेक्टेयर ज़मीन शामिल है। रेलवे ने बताया है कि 16 मौज़ों (गांवों) के लिए शुरुआती अधिसूचना जारी कर दी गयी है, जबकि आठ मौज़ों के लिए ज़मीन अधिग्रहण का अवॉर्ड पहले ही जारी किया जा चुका है।

रेलवे मंत्रालय ने बताया है कि 22 हेक्टेयर के सैंथिया बाईपास परियोजना के लिए ज़मीन अधिग्रहण का शुरुआती अधिसूचना जारी कर दिया गया है। रुक्नी से अनारा स्टेशन तक प्रस्तावित रेल पुल और पुरुलिया की ओर गौरीनाथधाम में एक और पुल के लिए इस साल 29 मई को ज़मीन अधिग्रहण के लिए सक्षम अधिकारी (सीएएलए) नियुक्त किया गया था और अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। इन परियोजना में हर एक के लिए लगभग 35 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत है।

रेलवे के अनुसार नबाद्वीपघाट-नबाद्वीपधाम नयी लाइन के मामले में, जिसके लिए 107 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत है और पश्चिम बंगाल सरकार ने ज़मीन की लागत का फिर से आकलन शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कार्य बल गठित की है। यह कार्य बल रेलवे सम्पर्क परियोजनाओं की निगरानी करेगी, उनकी प्रगति की समीक्षा करेगी और तेज़ी से काम पूरा करने के लिए लागू करने में आने वाली दिक्कतों को मिल-जुलकर सुलझाने में मदद करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार ने मेट्रो वायाडक्ट सेगमेंट लगाने के लिए चिंगरीघाटा क्रॉसिंग पर अस्थायी यातायात को परिवर्तित करने की मंज़ूरी मई में दी। इसके लिए अनुरोध लगभग डेढ़ साल पहले किया गया था। तब से क्रॉसिंग पर काम पूरा हो चुका है।

भूमि अधिग्रहण की रफ्तार बढ़ने के बावजूद रेल मंत्रालय ने लंबित परियोजनाओं के पूरा होने की नयी समय-सीमा बताने से इनकार किया है। मंत्रालय ने कहा कि परियोजना का पूरा होना कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे राज्य सरकार द्वारा ज़मीन का अधिग्रहण, वन विभाग की मंज़ूरी, यूटिलिटी सेवाओं को हटाना, कानूनी मंज़ूरी, भौगोलिक और स्थलाकृतिक स्थितियां, परियोजना केंद्र पर कानून-व्यवस्था और हर साल काम के लिए उपलब्ध महीनों की संख्या।

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