विद्या शंकर राय सेलखनऊ , मई 06 -- देश के पांच राज्यों में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनावों में यूं तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीन राज्यों में जीत हासिल की है लेकिन सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली जीत को लेकर हो रही है। भाजपा के नेता इस जीत को सबसे खास मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री जेपीएस राठौर भी कई महीनों तक पश्चिम बंगाल में जमे रहे।
उन्होंने इस जीत को सबसे अलग रखते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों की मेहनत के बाद भाजपा यह किला ढहाने में कामयाब हुई है इसलिए यह जीत वाकई में भाजपा के लिए खास है। आने वाले दिनों में भाजपा वहां बदले की भावना की बजाए बदलाव लाने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम करेगी।
जेपीएस राठौर ने यूनीवार्ता से विशेष बातचीत में कहा कि बंगाल चुनाव में जनता के बीच जो अंडरकरेंट था वो ममता दीदी पहचान नहीं पाईं। जनता के मन में इतना गुस्सा था कि वह हर हाल में बदलाव चाहती थी। बंगाल में गैर मुस्लिम समुदाय ने पूरी तरह से इंटैक्ट होकर भाजपा के लिए वोट किया जिसकी वजह से इतनी बड़ी जीत मिली है।
दरअसल, माइक्रो-मैनेजमेंट के विशेषज्ञ माने जाने वाले राठौर ने कई महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर चुनावी गणित को भाजपा के पक्ष में मोड़ने का काम किया। भाजपा ने यूपी से पश्चिम बंगाल में चार मंत्रियों और एक पूर्व मंत्री को अक्टूबर से हो चुनावी रण में उत्तर दिया था।
पार्टी ने चुनावी नजरिए से पश्चिमी बंगाल को पांच क्षेत्रों में बांटा था जिसमें तीन का जिम्मा सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को दिया गया था। इनमें से यूपी में चुनावी वार रूम संभालने चाले सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर की 35 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई थी। इन 35 विधानसभाओं में से 33 सीटों पर भाजपा को विजय मिली है।
बंगाल चुनाव में भाजपा की रणनीति को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्री राठौर ने कहा कि अब तक का ये परसेप्शन था कि लोग भाजपा को शहरी क्षेत्रों की पार्टी मानकर चलते थे लेकिन बंगाल में ठीक इसके उल्टा हुआ। बंगाल में शहरी क्षेत्रों की बजाए ग्रामीण इलाकों में भाजपा ज्यादा मजबूती के साथ खड़ी थी। पार्टी की रणनीति और बूथों के माइक्रोमैनेजमेंट से यह शानदार सफलता हासिल हुई है। इस जीत के बाद अब असली चुनौती सामने आने वाली जिम्मेदारियों को निभाने की है। ज्यादातर मीडिया बड़े शहरों में घूमकर चली जाती थी। वह गांवों का रुख नहीं करती थी जिससे उसे वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं मिल पाता था।
श्री राठौर कहते हैं, '' भाजपा की जो विराट विजय हुई है वह एक दिन में नहीं मिली है। इसके लिए कई दशकों तक पार्टी ने यहां काम किया है। पिछली बार चुनाव में पार्टी ने 77 सीटें हासिल की थी। लेकिन हम सरकार बनाने के आंकड़े से बहुत दूर रह गए। उस समय हमारे सामने बड़ी चुनौती अपने विधायकों को संभाल कर रखने की थी। हमारे सामने बड़ा खतरा विधायकों के पार्टी छोड़कर जाने का था। सात विधायक छोड़कर गए थी लेकिन फिर पार्टी ने स्थितियों को संभालने का काम किया तब जाकर पलायन रुक पाया। उसी का परिणाम है कि आज भाजपा बंगाल में अपने दम पर खड़ी नजर आ रही है।''जेपीएस राठौर ने कहा कि जब आप पिछले तीन चुनावों 2019 के लोकसभा चुनाव, 2021 में बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव, उसके बाद 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बंगाल में हुई वोटिंग का पैटर्न देखेंगे तो आपको लगेगा कि भाजपा को इन तीनों चुनावों में भाजपा को करीब 40 फीसदी के आसपास वोट मिला। हमारे सामने चुनौती सिर्फ पांच से सात फीसदी वोट प्रतिशत बढ़ाने की थी। पार्टी को उम्मीद थी कि यदि हम यह लक्ष्य हासिल कर लेते हैं तो बंगाल में हमारी विजय तय है और 2026 में यही हुआ है। भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ने से सफलता मिली है।
पूरे चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल के प्रयासों के बारे में पूछे जाने पर राठौर ने कहा कि संगठन ने चुनाव घोषित होने के काफी पहले से अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। चुनाव आयोग ने मतदान को दो चरण में कराया जिससे तृणमूल के असामाजिक तत्वों को एक जगह से दूसरे जगह जाकर गुंडई करने का मौका नहीं मिल पाया। चुनाव में गृहमंत्री अमित शाह जी लगभग 15 दिनों तक बंगाल में रुके रहे और सुनील बंसल जी ने पूरी रणनीति पर पैनी नजर रखी। इन दोनों की अगुवाई में पार्टी में यूपी और अन्य राज्यों से आए हुए नेताओं ने उस रणनीति को बूथ स्तर तक लागू किया जिसका परिणाम सबके सामने है।
ममता बनर्जी के आरोपों को लेकर कैबिनेट मंत्री जेपीएस राठौर ने कहा कि ममता बनर्जी झूठ की दीदी हैं। बंगाल की जनता ने उनके झूठ को समय रहते पहचान लिया। उनके आरोपों में कोई दम नहीं है। उनका ये आरोप की मतगणना केंद्र के भीतर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया सरासर गलत है। ममता बनर्जी जैसी महिला के साथ कोई दुर्व्यवहार कैसे कर सकता है। आने वाले समय में अब भाजपा की सरकार पूरे मनोयोग से जनता के बीच जाकर काम करेगी।
विपक्ष ने भाजपा पर बदले की भावना से कार्य करने करने के आरोपों को लेकर राठौर ने कहा कि भाजपा बदले की भावना से काम नहीं करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल में बदला नहीं बदलाव की बात होनी चाहिए। भाजपा यहां बदलाव के लिए लड़ रही थी। जहां तक बदले का सवाल है तो संगठन स्तर पर सभी जिले के पदाधिकारियों को पार्टी की मंशा के बारे में बता दिया गया है कि कहीं भी बदले की भावना से कोई कदम नहीं उठाया जाए।
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