कोलकाता , मार्च 04 -- उच्चतम न्यायालय के हाल ही में बकाया महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान करने के आदेश के बावजूद, पश्चिम बंगाल सरकार के अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाने पर कर्मचारियों ने 13 मार्च को ''बंध मुबारक'' का ऐलान किया है।

राज्य सरकार के कर्मचारियों के संग्रामी जौथा मंच ने बुधवार को नए सिरे से विरोध प्रदर्शन का आह्वान करते हुए ऐलान किया कि वह 13 मार्च को सभी कार्यालयों में ''बंध मुबारक'' कार्यक्रम मनाएगा।

संगठन के सदस्य कार्यालयों में आयेंगे लेकिन बकाया डीए के भुगतान की अपनी मांग पर ज़ोर देने के लिए कोई भी आधिकारिक काम नहीं करेंगे।

इससे पहले, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को पांच फरवरी को अपने कर्मचारियों को बकाया डीए का 25 प्रतिशत तुरंत भुगतान करने का निर्देश दिया था। बाकी 75 प्रतिशत एक तय रोडमैप के हिसाब से दिया जाना है। यह फैसला अगस्त 2009 और दिसंबर 2019 के बीच जमा हुए डीए बकाया पर लागू होता है। इसमें केंद्र और राज्य के बीच मौजूदा डीए का अंतर शामिल नहीं है, जो 40 प्रतिशत है और अप्रैल से घटकर 36 प्रतिशत हो जाएगा।

अदालत ने इसे लागू करने की देखरेख के लिए उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अगुवाई में एक समिति बनाई। इसमें झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गौतम भादुड़ी और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

समिति को कुल देय रकम तय करने, भुगतान के लिए समय सीमा और किश्तें तय करने और यह निगरानी करने का काम सौंपा गया है कि फंड तय समय पर जारी हो रहे हैं या नहीं। 75 प्रतिशत बकाया के बारे में सभी फैसले राज्य सरकार से सलाह करके लिये जाएंगे।

इस मौके पर संग्रामी जूथा मंच के नेता संदीप घोष ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के एक महीने बाद भी राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

श्री घोष ने कहा, "अदालत ने राज्य को छह मार्च तक पहली किश्त के बारे में अपना फैसला बताने का निर्देश दिया था। हमने 13 मार्च के अपने कार्यक्रम की घोषणा करने से पहले तब तक इंतजार किया। हम अपना जायज बकाया पाने के लिए जितना ज़रूरी होगा, उतना करने को तैयार हैं।"प्रशासनिक सूत्रों ने संकेत दिया है कि राज्य सरकार एक अधिसूचना जारी कर सकती है और अगर कर्मचारी 'बंध मुबारक' कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं तो सख्त कार्रवाई कर सकती है।

कार्यभार संभालने के बाद से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हड़ताल और शटडाउन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें ऐसे आंदोलनों में शामिल होने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शामिल है।

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