कोलकाता , अप्रैल 07 -- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 'विचाराधीन' सूची से हटाए गए नामों का जिला-वार विवरण जारी कर दिया है।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, लगभग 60 लाख मतदाताओं की इस श्रेणी में से 27 लाख,16 हजार, 393 नाम हटा दिए गए हैं। इसके साथ ही सात अप्रैल तक पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की कुल संख्या बढ़कर 90 लाख, 83 हजार, 345 हो गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले आयोग ने 28 फरवरी को प्रकाशित पहली सूची में 63 लाख , 66 हजार, 952 नाम हटाए थे। अब इसमें 27 लाख से अधिक नए नाम जुड़ने के बाद यह आंकड़ा एक करोड़ के करीब पहुंच गया है, जिसने चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद जिले में विचाराधीन सूची से सर्वाधिक 4 लाख ,55 हजार, 137 नाम हटाए गए हैं। अगर 28 फरवरी की पहली सूची में हटाए गए 2 लाख, 93 हजार, 822 नामों को भी जोड़ लिया जाए, तो अकेले मुर्शिदाबाद में ही अब तक लगभग 7 लाख, 49 हजार नाम काटे जा चुके हैं।
हालांकि विचाराधीन सूची के मामले में मुर्शिदाबाद शीर्ष पर है, लेकिन दोनों सूचियों के संयुक्त आंकड़ों को देखें तो उत्तर 24 परगना सर्वाधिक प्रभावित जिला बनकर उभरा है। आयोग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर 24 परगना में विचाराधीन सूची से तीन लाख, 25 हजार, 666 नाम हटाए गए। पूर्व में हटाए गए 12 लाख, 60 हजार, 96 नामों को मिलाकर इस जिले में कुल कटौती का आंकड़ा सबसे अधिक 15 लाख, 82 हजार, 762 तक पहुंच गया है।
दक्षिण 24 परगना में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कम हुए हैं, जहाँ दोनों सूचियों को मिलाकर कुल 10 लाख, 91 हजार, 98 नाम हटाए गए हैं। इसी प्रकार मालदा जिले में विचाराधीन सूची से दो लाख, 39 हजार, 375 नाम हटाए गए, जिससे यहाँ कुल कटौती चार लाख, 59 हजार, 530 हो गई है।
अन्य जिलों में भी बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की पुष्टि हुई है। पूर्व मेदिनीपुर में कुल एक लाख, 65 हजार, 345 मतदाता हटाए गए हैं, जबकि अकेले कोलकाता में दो चरणों के दौरान कुल 6 लाख, 97 हजार, 160 नाम सूची से बाहर किए गए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होने से पहले ही लगभग 58 लाख नाम हटा दिए गए थे। इसके बाद 28 फरवरी की अंतिम सूची में करीब पांच लाख और नामों की कटौती की गई थी।
इसके पश्चात, 60 लाख, छह हजार, 675 मतदाताओं को गहन जांच के लिए 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया था, जिनमें से अब 59 लाख, 84 हजार, 512 मतदाताओं का आधिकारिक डेटा जारी कर दिया गया है।
आयोग के अनुसार, शेष 22 हजार, 163 मतदाताओं के मामलों का निपटारा तो हो चुका है, लेकिन उनके आवेदनों पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर न होने के कारण उन्हें लंबित रखा गया है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही हटाने वाली सूची में कुछ और नाम जुड़ सकते हैं।
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