कोलकाता , जुलाई 27 -- नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने पश्चिम बंगाल के लघु खनिज क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान की बात कही है।
कैग ने इसके पीछे लीज एग्रीमेंट को लागू करने में देरी, सरकारी बकाया वसूलने में विफलता, अपर्याप्त निगरानी और खनिजों के अनधिकृत खनन को मुख्य वजह बताया है।
गौरतलब है कि ये निष्कर्ष 2017-18 से 2021-22 की अवधि के लिए उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग तथा भूमि एवं भूमि सुधार और शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास विभाग को शामिल करते हुए, लघु खनिज खनन के राजस्व संग्रह और नियंत्रण पर किये गये विस्तृत अनुपालन ऑडिट का हिस्सा हैं।
कैग ने जिस अवधि का ऑडिट किया है उस दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता में थी।ऑडिट में पाया गया कि 73 लीज एग्रीमेंट में 31.95 करोड़ क्यूबिक फीट के सालाना खनन लक्ष्य के मुकाबले 841 से 1,801 दिनों की अवधि के लिए लीज एग्रीमेंट लागू नहीं किए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार इसके परिणामस्वरूप रॉयल्टी और उपकर के रूप में 53.04 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ क्योंकि संबंधित रेत ब्लॉकों को न तो रद्द किया गया और न ही उनकी दोबारा नीलामी की गई। इसमें कहा गया है कि मिट्टी के अनधिकृत खनन के खिलाफ कार्रवाई न करने के कारण 1,272 अनधिकृत ईंट-मिट्टी संचालकों से 19.48 करोड़ रुपये की वसूली नहीं हो सकी। विभाग 18 सफल बोलीदाताओं से 13.09 करोड़ रुपये की बकाया बोली राशि और देर से भुगतान के लिए 3.07 करोड़ रुपये का ब्याज वसूलने में भी विफल रहा।
ऑडिट में यह भी पाया गया कि 35 में से 24 लीज से 10.05 करोड़ रुपये की बकाया बोली राशि वसूल नहीं हो पाई, जबकि मूल्यांकन के 16 से 25 महीने बाद भी कार्यवाही शुरू न करने के कारण 4.12 करोड़ रुपये की और वसूली नहीं हो सकी। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभागीय डेटा के अपर्याप्त पुन: सत्यापन के कारण 902 ठेकेदारों द्वारा किए गए खनिज खनन का पता नहीं चल सका और परिणामस्वरूप 3.62 करोड़ रुपये की वसूली नहीं हो पाई। पट्टेदारों और ठेकेदारों से समय पर भुगतान के लिए नियम न होने की वजह से 230 ईंट-भट्ठा मालिकों से 3.35 करोड़ रुपये की वसूली नहीं हो पाई या कम वसूली हुई।
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