कोलकाता , जून 11 -- पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना जिले के एक निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूल से देर रात तलाशी अभियान के दौरान 1.77 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं।

पुलिस ने गुरुवार को बताया कि कांचरापाड़ा इलाके में स्थित इस स्कूल में बुधवार रात तलाशी शुरू हुई, जो गुरुवार सुबह करीब चार बजे तक चली। इस घटना से राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है और धनराशि के स्रोत का पता लगाने के लिए पुलिस जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान बयानों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद, पुलिस ने पूछताछ के लिए स्कूल के कैशियर अभिक नाथ और सहायक लेखाकार सायन घोष को हिरासत में ले लिया है।

सूत्रों के अनुसार, यह नकदी स्कूल के 'सिक रूम' (बीमार बच्चों के कमरे) के रूप में इस्तेमाल होने वाले एक कमरे की अलमारी के अंदर छिपाकर रखी गई थी। जांच के दौरान अधिकारियों को उसी कमरे से कंडोम के कई पैकेट भी बरामद हुए हैं, जिससे स्कूल के भीतर होने वाली गतिविधियों पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।

कथित गड़बड़ियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीपीएफ) के जवानों के साथ स्कूल पहुंची थी। बरामद रकम की गिनती के लिए परिसर में नोट गिनने वाली मशीनें लाई गईं। शुरुआत में दो मशीनें लगाई गईं, लेकिन गिनती रातभर चलने के कारण बाद में तीसरी मशीन भी मंगवाई गई। सुबह होने तक अधिकारियों ने लगभग 1.77 करोड़ रुपये गिन लिए थे।

यह घटना कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज में छात्र संघ के दफ्तर से हाल ही में कैश, हथियार और गर्भनिरोधक पैकेट बरामद होने के ठीक बाद सामने आई है, जिस मामले पर पहले ही काफी विवाद हो चुका है।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक सुदीप्त दास ने हाल ही में बीजपुर विधानसभा क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों की जांच का एक अभियान शुरू किया था, जिसके बाद उनकी टीम के सदस्यों ने उन्हें इस स्कूल में हो रही कथित गड़बड़ी की जानकारी दी। इसके बाद विधायक खुद स्कूल पहुंचे और पुलिस को अलर्ट किया।

पत्रकारों से बात करते हुए सुदीप्त दास ने इस बरामदगी की तुलना राज्य में पहले पकड़े गए बड़े नकदी घोटालों से की। उन्होंने कहा, "किसी स्कूल के अंदर आमतौर पर इतनी बड़ी रकम नहीं मिल सकती। इस संस्थान में पहले से ही कई गड़बड़ियों के आरोप लग रहे थे और अब यह बरादमगी सामने आई है।"श्री दास ने कहा, "यह भारी-भरकम काला धन है। इस मामले में स्कूल के पूर्व अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस नेता कमल अधिकारी, उनके बड़े भाई और विधायक सुबोध और सांसद पार्थ भौमिक की भूमिका बेहद संदिग्ध है।"भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि यह नकदी स्कूल की नहीं है, बल्कि यह स्थानीय राजनीतिक हस्तियों से जुड़ा अघोषित धन हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्कूल के प्रबंधन के संबंध प्रभावशाली नेताओं से हैं।

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