कोलकाता , अगस्त 25 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बाजार निगरानी बढ़ाने और कृत्रिम किल्लत पर नकेल कसने के दिए गए निर्देशों के बाद, पूरे राज्य में चीनी की जमाखोरी, मूल्य में हेरफेर और कालाबाजारी के खिलाफ केंद्र और राज्य प्रशासन का संयुक्त प्रवर्तन अभियान और तेज हो गया है।
राज्य प्रशासन ने 72 अनुमंडलों में प्रवर्तन नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है और 35 पुलिस कमिश्नरेट के तहत समर्पित प्रवर्तन शाखाओं को तैनात किया है। अधिकारियों ने आपूर्ति श्रृंखला में लीकेज की पहचान करने, अवैध भंडारण का पता लगाने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को रोकने के लिए कम से कम 1,000 निरीक्षणों और छापेमारी का लक्ष्य रखा है।
नबन्ना सचिवालय से मुख्यमंत्री के चीनी, चावल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के 24 घंटे के भीतर इस अभियान ने गति पकड़ ली। प्रशासन मुख्य रूप से उन बिंदुओं का पता लगाने पर ध्यान लगा रहा है जहां थोक आपूर्तिकर्ताओं और खुदरा विक्रेताओं के बीच कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जा रहा है।
कोलकाता में प्रर्वतन ने कोले मार्केट, श्यामबाजार, गरिया बाजार और जादू बाबू बाजार सहित प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में अचानक निरीक्षण किया। अधिकारी स्टॉक रजिस्टर, खरीद और बिक्री के रिकॉर्ड, मौजूदा थोक दरों और भंडारण सुविधाओं की जांच कर रहे हैं ताकि यह तय किया जा सके कि व्यापारी स्टॉक दबाकर तो नहीं रख रहे हैं या खरीद लागत से असंगत कीमतें तो नहीं वसूल रहे हैं। लालबाजार से मिले निर्देशों के बाद दल की 10 विशेष टीमें गठित की गईं, जिनके अधिकारी मंगलवार सुबह से ही शहर भर में फैल गए। चीनी के अलावा ये टीमें चावल और खाद्य तेल की अवैध जमाखोरी पर भी नजर रख रही हैं।
प्रवर्तन दल की टीमें ने कोलकाता के अलावा नादिया, अलीपुरद्वार, कूच बिहार सहित दूसरे नगरों के अधिकारियों के साथ कई जगह निरीक्षण किया।
प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए गोदामों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की निगरानी कर रहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए तय अनाज और सामग्री को अवैध मुनाफे के लिए खुले बाजार में न भेजा जाए।
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