सिलीगुड़ी , सितंबर 4 -- पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिला प्रशासन ने एक आलू कोल्ड स्टोरेज से दो नाबालिग लड़कों समेत तीन लोगों को सुरक्षित बचा लिया है। यह कार्रवाई कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी कराने की शिकायत मिलने के बाद की गई।
प्रशासन को गुरुवार को सूचना मिली थी कि इन तीन लोगों को कोल्ड स्टोरेज में बंधक बनाकर रखा गया है और उनसे जबरन बंधुआ मजदूरी कराई जा रही है। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन ने जिला श्रम विभाग और बंगाल पुलिस के सहयोग से संयुक्त अभियान चलाकर तीनों को मुक्त कराया।
सहायक श्रम आयुक्त प्रदीप तमांग ने इस बचाव अभियान की पुष्टि करते हुए बताया कि श्रम विभाग ने तीनों व्यक्तियों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार उन्हें आवश्यक सहायता और पुनर्वास सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, साथ ही उन्हें बंधक बनाकर काम कराने के जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, मुक्त कराए गए लोगों की पहचान 50 वर्षीय कालीपद मोंडल और दो नाबालिग लड़कों के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। ये सभी दक्षिण 24 परगना जिले के सुंदरबन के पास स्थित नंदीकुमार क्षेत्र के रहने वाले हैं।
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कालीपद मोंडल को 25,000 रुपये का एडवांस देकर कथित तौर पर बंधुआ मजदूर के रूप में रखा गया था। वहीं दोनों नाबालिग लड़कों को भी उनके साथ एक श्रम ठेकेदार के माध्यम से लाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों को करीब एक दशक पहले एक ठेकेदार द्वारा काम के सिलसिले में इस इलाके में लाया गया था।
जांच में पाया गया कि तीनों लोगों को कोल्ड स्टोरेज परिसर में ही कैद रखा गया था और उन्हें बाहर जाने या स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति नहीं थी। अग्रिम राशि के बदले उनकी मजदूरी का एक हिस्सा भी काट लिया जाता था।
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