बेतिया , नवंबर 02 -- बिहार में पश्चिम चंपारण जिले की पंचायती राज विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन में गंभीर लापरवाही सामने आयी है औरइन योजनाओं पर अपेक्षा से कम खर्च, करोड़ों रुपये के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित रहने, परियोजनाओं के अधूरे होने और एक ही वेंडर को बड़े पैमाने पर भुगतान किये जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने जांच और कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।
पंचायती राज विभाग के सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में जिले के उप विकास आयुक्त और जिला पंचायत राज पदाधिकारी को लंबित कार्यों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। समीक्षा के दौरान पोस्ट सीएफएमएस अवधि के कुल 353.46 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित पाये गये।
बैठक में सामने आया कि 15वें वित्त आयोग के तहत जिला परिषद की योजनाओं पर महज 21.72 प्रतिशत राशि ही खर्च की गयी है, जबकि पंचायत समितियों का व्यय 66.67 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों का 69.17 प्रतिशत रहा। इसी तरह, षष्ठम राज्य वित्त आयोग के तहत जिला परिषद का व्यय 17.18 प्रतिशत, पंचायत समितियों का 40.39 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों का 21.59 प्रतिशत दर्ज किया गया।
पिछले पांच वर्षों के दौरान ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पायी गयी। जिला परिषद की 1585 योजनाओं में से केवल 100, पंचायत समितियों की 2649 में से 172 और ग्राम पंचायतों की 16177 में से महज 586 योजनाएं ही पूर्ण पायी गयीं। वहीं, विभिन्न प्रखंडों में एक ही वेंडर को कुल भुगतान की 70 से 75 प्रतिशत राशि दिये जाने के मामलों में जिला स्तर पर विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिए गए।
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